बहेड़ी। दो बहनों से सामूहिक दुष्कर्म और वीडियो वायरल करने के मामले में थाना पुलिस ने तो किरकिरी कराने में कसर नहीं छोड़ी थी पर अफसरों ने सूझबूझ से बात संभाल ली। डीआईजी ने मौके पर जाकर हिदायत दी तो कप्तान ने खुद थाने में कैंप करके गिरफ्तारी की राह आसान की। महिलाओं को थाने में बैठाकर दबाव की रणनीति बनाई तो दूर भाग चुके आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी।
एसएसपी शैलेश पांडेय ने गुरुवार शाम से ही एसपी देहात और एसपी क्राइम को टीमों समेत कार्रवाई में लगा दिया था। फिर शेरगढ़, देवरनियां, शीशगढ व भोजीपुरा का फोर्स दबिश देता रहा। सर्विलांस टीम ने उन नंबरों की लोकेशन ट्रेस की जिनसे क्लिपिंग वायरल हुई थी। आरोपियों समेत कुछ और नंबरों की लोकेशन गांव से दूर जंगल में मिल रही थी। पुलिस जब नामजदों के घरों में पहुंची तो पीछे की ओर खेतों में जाने वाले दरवाजे खुले मिले। घर में केवल महिलाएं थीं। महिला पुलिस की मदद से पांचों आरोपियों के घर से एक-एक महिला को थाने भिजवा दिया गया। गांव में पुलिस ने माहौल बनाया कि आरोपियों के न मिलने पर पूरे परिवारों को जेल भेजा जाएगा और घरों की कुर्की की जाएगी। रणनीति कामयाब हो गई। सुबह चार बजे से महिलाओं को छोड़ने का दबाव पुलिस पर पड़ने लगा। महिलाएं घर जाती रहीं और नामजद आरोपी थाने पहुंचते रहे। मुख्य आरोपी वसीम बेहद चालाक था। सबसे ज्यादा परेशान उसी ने किया। बाद में वह भी हत्थे चढ़ गया। एसएसपी ने पांचों आरोपियों से बारी-बारी से पूछताछ की। वसीम ने ही बाद में पूरी हकीकत बताई। दोनो पीड़िता भी मेडिकल परीक्षण के बाद थाने पहुंचीं तो एसएसपी ने उनसे भी बात की। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद सबसे ज्यादा राहत इंस्पेक्टर रामौतार सिंह को मिली जिन्हें अपना बिस्तर बंधने का पूरा अंदेशा था। उन्होंने स्वीकार भी किया कि सफलता न मिलने पर उन पर कार्रवाई तय थी।
कप्तान ने स्टाफ के पेंच कसे, दरोगा को फटकारा
- एसएसपी ने बंद कमरे में इंस्पेक्टर और दरोगाओं के साथ बैठक कर उनके पेंच कसे। लापरवाही और टरकाने वाली मानसिकता न छोड़ने पर कार्रवाई की चेतावनी दी। कहा कि जब कोई शिकायत लेकर आए तो तत्काल उसकी शिकायत दर्ज कर एक्शन लें। सूत्रों के मुताबिक एसएसपी हलका दरोगा से बेहद नाराज दिखे। पूरे मामले के निपटने के बाद हलका दरोगा पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। पीड़ित पक्ष ने भी हलका दरोगा द्वारा उन्हें 36 घंटे तक टरकाने की बात कही जो उन्हें बेहद अखर रही थी।
देवरनियां पुलिस ने तो मामला मैनेज कर डाला था
- पीड़ित देवरनियां थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं इसलिए बीस नवंबर को वीडियो वायरल होने के बाद वह सीधे देवरनिया थाने पहुंचे थे। वहां तहरीर देने की बात कही तो पुलिस ने इसे बहेड़ी थाने का मामला बताकर हाथ खड़े कर लिए। वहीं देवरनियां पुलिस समझौते की कोशिश में लग गई। रात भर कुछ पुलिसकर्मी पीड़ितों के घर के पास सक्रिय रहे। सूत्र बताते हैं कि पीड़ित परिवार के कुछ लोगों को भलाई बुराई का डर दिखाकर खामोश रहने के लिए तैयार भी कर लिया गया। हालांकि किशोरियों के पिता नहीं मानें तो यह खेल बिगड़ गया।
पीड़ित परिवार बोले- हमें न्याय की उम्मीद
बरेली। दरोगा और थाना पुलिस के उपेक्षित रवैये से पीड़ित परिवार काफी निराश थे। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बाद में इतनी तेज कार्रवाई होगी। मामला मीडिया और अफसरों की नजर में आने के बाद तेज कार्रवाई से दोनों परिवार संतुष्ट दिखे। कहा कि उन्हें अब न्याय की उम्मीद है। पुलिस तेजी से कार्रवाई कर रही है।