बरेली। छात्र लकी की हत्या के खुलासे के बाद भी परिवार को यकीन नहीं है कि बरामद शव उनके बेटे का था। सच पता करने के लिए पुलिस ने मंगलवार को जिला अस्पताल ले जाकर लकी के बड़े भाई का डीएनए सैंपल लिया।
गंगानगर निवासी लकी की गुमशुदगी 30 सितंबर को उसके पिता इफको कर्मचारी विनीत वाजपेई ने सुभाषनगर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने महानगर कॉलोनी निवासी यशपाल मेहता के बेटे गगन और दीपक पर शक जताया था। सुभाषनगर पुलिस खुलासे में नाकाम रही तो विवेचना क्राइम ब्रांच को दी गई। 11 नवंबर को क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया कि गगन ने ही बाइक हड़पने की खातिर लकी की हत्या की। शव छुपाने में उसके बड़े भाई दीपक ने मदद की। खुलासे के बाद दोनों भाई जेल भेजे गए थे। इस घटनाक्रम के बीच इज्जत नगर क्षेत्र में मिले एक शव का पुलिस ने अज्ञात के तौर पर अंतिम संस्कार कर दिया था। बाद में हत्यारोपियों ने खुलासा किया कि ये शव लकी का ही था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट उलझी होने की वजह से लकी के पिता यह मानने को तैयार नहीं हैं कि शव लकी का ही था। मंगलवार को लकी के बड़े भाई विशाल को लेकर विवेचक राजीव सिंह जिला अस्पताल पहुंचे। वहां उसके ब्लड का सैंपल लिया गया। यह सैंपल लैब को जांच के लिए भेजा जाएगा।