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इलाज में देरी ने भी बढ़ाई मुश्किल, एंबुलेंस वाला बोला- तेल खत्म हो गया

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हादसे के बाद जाम। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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मदद को आए अंजान लड़कों ने की जाम लगाने की कोशिश, पुलिस ने बमुश्किल हटाया
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पीलीभीत बाईपास की घुप स्ट्रीट लाइटें भी हादसे की जिम्मेदार

बरेली। तेज रफ्तार के अलावा अंधेरे हाईवे पर सिस्टम की बदइंतजामी की वजह से यह हादसा हुआ। डिवाइडर में बाइक भिड़ी तो लड़के उछलकर दूर जा गिरे। वहीं एंबुलेंस आने में पौन घंटा लग गया। ड्राइवर ने तेल न होना बताया तो विरोध में मदद को आए अंजान युवाओं ने हाईवे पर हंगामा कर जाम लगाने की कोशिश की। पुलिस ने बमुश्किल इन्हें हटाया।
जिले में हाईवे और बाईपास पर टूटे डिवाइडर, अंधेरे रास्तों और गड्ढों की वजह से आए दिन हादसे होते हैं। हाल ही में कई लोगों की मौत हो गई है। ये हादसा भी काफी हद तक अंधेरे की वजह से हुआ। डोहरा मोड़ से पीलीभीत दिशा में आगे बढ़ने पर काफी दूर तक स्ट्रीट लाइटें बंद थीं। लड़के बाइक पर तेज गति से आ रहे थे और अंधेरे में नियंत्रण न होने से बाइक डिवाइडर व पोल में घुस गई। हादसे के करीब पांच मिनट बाद पीछे से आ रहे वाहन चालकों ने सड़क पर पड़े लड़कों को देखकर वाहन रोके और एंबुलेंस 108 को कॉल करना शुरू किया। काफी देर बाद कॉल लगी तो एंबुलेंस ड्राइवर ने जल्दी आने में असमर्थता जताई। इस उहापोह में करीब आधा घंटा गुजर गया। हैरत की बात रही कि इस बीच कोई पुलिस वैन भी यहां से नहीं गुजरी। तब लोगों ने सौ नंबर लगाना शुरू किया। हादसे के करीब पौन घंटे बाद पुलिस आई और तभी दूसरी एंबुलेंस आ सकी। इस लापरवाही को लेकर लोगों में खासा गुस्सा था। उन्होंने हंगामा किया और दरोगा कुलदीप से उलझने लगे। कुछ और पुलिस बुलाई तो उन्हें समझाकर हटाया।
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मोबाइल में लगे थे स्क्रीन लॉक, पहचान में हुई देर
हादसे के बाद पहुंची पुलिस ने घायल और मृतकों की पहचान की कोशिश की तो काफी मुश्किल आई। पुलिस को सभी के मोबाइल पर स्क्रीन और पैटर्न लॉक लगा मिला। इसके बाद तलाशी ली गई तो एकाध का पहचान पत्र मिला। बाइक की क्षतिग्रस्त नंबर प्लेट पर नंबर स्पष्ट नहीं थे तो चेसिस से मालिक की पहचान करने की कोशिश की। शानू के परिवार को तो देर रात खबर हो सकी।
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होटल मैनेजमेंट की ट्रेनिंग कर रहा था सौरभ
फरीदपुर की लौंगपुर सहकारी समिति के सचिव योगेंद्र गंगवार का बेटा सौरभ उर्फ गौरव पढ़ाई में काफी होशियार था। वह बरेली कॉलेज से प्राइवेट बीए कर रहा था तो उसने देहरादून के कॉलेज से होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कर रखा था। इसके बाद उसने जॉब के लिए आवेदन किया। इसमें चयन हो गया था। वह कोलकाता में ट्रेनिंग करने गया था। वहां से 12 नवंबर को आया था और 19 को उसे वापस जाना था। वह अश्विनी का तहेरा भाई था। देर रात निजी अस्पताल में अश्विनी को देखने पहुंचे उसके पिता विवि में लैब टेक्नीशियन सुरेश पहुंचे। उन्होंने बताया कि अश्विनी सौरभ के पास था। अश्विनी की बाइक से दोनों उन्हीं के पास विवि परिसर में आ रहे थे। अश्विनी की हालत गंभीर बनी हुई थी। अश्विनी वुडरो कॉलेज में इंटर का छात्र है।
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