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लकी हत्याकांड- बरामद लाश लकी की ही थी, इसकी पुष्टि को होगा डीएनए टेस्ट

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बरेली। सुभाषनगर निवासी छात्र लकी वाजपेई की हत्या का मामला खुलासे के बाद भी उलझता जा रहा है। पुलिस के खुलासे पर परिवार को यकीन नहीं है तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट की खामियों ने भी उनकी चिंता बढ़ाई है। कपड़ों की पहचान भी आधी अधूरी होने से परिवार की मांग पर पुलिस अब डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी में है।
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लकी की गुमशुदगी 30 सितंबर को उसके पिता गंगानगर निवासी इफको कर्मचारी विनीत वाजपेई ने सुभाषनगर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने महानगर कॉलोनी निवासी यशपाल मेहता के बेटे गगन और दीपक पर शक जताया था। सुभाषनगर पुलिस हिरासत में लेने के बाद भी उनसे कुछ नहीं उगलवा सकी, लिहाजा उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि लकी की बाइक उनके दोस्त के घर से बरामद हुई थी। विनीत की शिकायत पर विवेचना क्राइम ब्रांच को दी गई तो टीम ने तीन दिन बाद 11 नवंबर को खुलासा कर दिया। गगन और उसका भाई दीपक ही हत्यारोपी निकले। गगन ने बताया कि उसके प्रोफेसर पिता ने उसे बाइक नहीं दिलाई थी। लकी से दोस्ती फेसबुक पर अगस्त में हुई थी। उसके पास बाइक थी। उसकी बाइक हड़पने की खातिर उसकी हत्या कर दी। बाद में भाई के साथ मिलकर शव इज्जतनगर क्षेत्र में फेंक दिया।
विनीत वाजपेई को इस बात का मलाल है कि अगर वह बेटे का ही शव था तो सुभाषनगर पुलिस की घोर लापरवाही की वजह से वह उसका अंतिम संस्कार नहीं कर सके। अब उस शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पेच फंसा दिया है। रिपोर्ट में मृतक की उम्र करीब 42 साल और हत्या का समय एक महीने पहले का दिखाया गया है। विनीत का कहना है कि उनके बेटे की उम्र से दोगुनी उम्र दिखाई जा रही है, वहीं शव मिलने से केवल आठ दिन पहले ही लकी लापता हुआ था। ऐसे में उन्हें नहीं लगता है कि वह शव लकी का था। विनीत की पत्नी लकी के कपड़ों की पहचान करने सुभाषनगर थाने भी गईं। वहां उन्होंने शर्ट तो पहचानी पर पेंट को लेकर असमंजस रहा। विनीत का कहना था कि क्राइम ब्रांच उनकी मदद कर रही है, वह डीएनए टेस्ट से सच्चाई साबित करेंगे।
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पुलिस की अभी तक की पड़ताल और आरोपियों के कबूलनामे से अज्ञात के तौर पर मिला शव लकी का ही था। हालांकि लकी के पिता की मांग पर पुलिस को डीएनए टेस्ट कराने में कोई गुरेज नहीं है। विवेचक जरूरी कार्रवाई करके लकी के माता-पिता का सैंपल लेकर डीएनए जांच कराएंगे। - रमेश कुमार भारतीय, एसपी क्राइम
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