बरेली। 11वीं में पढ़ने वाले सुभाषनगर के छात्र लकी की हत्या उसके फेसबुक फ्रेंड ने ही की थी। प्रोफेसर पिता के बाइक न दिलाने पर फेसबुक फ्रेंड गगन ने लकी की बाइक हथियाने के लिए उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद गगन के भाई ने दीपक ने लाख इज्जतनगर में रोड किनारे फेंक दी। गलत बयान देकर पॉलीटेक्निक के ये दोनों छात्र पुलिस की विवेचना में साफ बच गए थे, लेकिन क्राइम ब्रांच के हाथ लगी एक ऑडियो रिर्कॉडिंग ने इस साजिश का पर्दाफाश कर दिया। सोमवार को दोनों को जेल भेज दिया गया।
लकी की गुमशुदगी उसके पिता गंगा नगर निवासी इफको कर्मचारी विनीत वाजपेई ने 30 सितंबर को सुभाष नगर थाने में दर्ज कराई थी। उन्होंने महानगर कॉलोनी निवासी यशपाल मेहता के बेटे गगन और दीपक पर शक जताया था। सुभाष नगर पुलिस उनसे कुछ न खुलवा सकी। लकी की बाइक इन्हीं के एक दोस्त के घर से बरामद की गई थी। लकी के पिता ने फिर शिकायत की तो पुलिस ने आरोपियों को पकड़कर छोड़ दिया। लड़कों ने यही कहा कि लकी अपनी बाइक उनके यहां खड़ी करके फनसिटी चला गया। परिवार ने पुलिस से तंग होकर डीआईजी से विवेचना बदलवाने की मांग की थी।
दोस्त को फोन पर बताया सच तो फंसा
क्राइम ब्रांच ने फेसबुक से डाटा निकाला तो पता लगा कि लकी से गगन की दोस्ती फेसबुक पर अगस्त में ही हुई थी। इनके कुछ और दोस्तों की डिटेल और नंबर निकाले गए। पूछताछ में गगन के बेहद करीबी दोस्त ने पुलिस को एक कॉल रिकार्डिंग दी। इसमें बातचीत के दौरान गगन ने उससे स्वीकारा था कि वह अंजाने में बड़ा अपराध कर चुका है और अब फंस सकता है। इस रिकार्डिंग को कब्जे में लेने के बाद क्राइम ब्रांच ने सख्ती की तो दोनों भाई टूट गए।
प्रोफेसर पिता की कंजूसी और लकी के स्टाइल से था गुस्सा
गगन ने बताया कि उसके पिता एक निजी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर हैं। घर की माली हालत ठीक है पर अनुशासन बनाने और पढ़ाई के नाम पर उन्होंने उसकी सारी इच्छाएं खत्म कर दीं। पिता ने उसके लाख कहने पर उसे या भाई को बाइक नहीं दिलाई। पॉलीटेक्निक में दोनों भाई टेंपो या बस से जाते थे तो दोस्त हंसते थे। इसी वजह से उसकी कोई गर्लफ्रेंड नहीं थी। वहीं लकी के पास अच्छी बाइक और मोबाइल था। उसने सोच लिया कि लकी को मारकर उसकी बाइक रख लेगा। लकी का उसके परिवार में ज्यादा आनाजाना नहीं है, इसलिए कोई शक भी नहीं करेगा।
गगन ने की हत्या, दीपक ने छुपाई लाश
गगन ने बताया कि उसने 28 सितंबर को बहाने से लकी को अपने घर बुलाया। उसे बीयर में कई नींद की गोलियां दे दीं। जब वह बेहोश हो गया तो दुपट्टे से गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव को घर में ही बड़े बक्से में छिपा दिया। अगले दिन बदबू आई तो बड़े भाई दीपक को भी पता चल गया। दीपक ने भी उसकी मदद करते हुए शव कंबल में लपेट दिया और दोनों लकी की बाइक पर ही उसका शव रखकर इज्जत नगर साइड में ले गए और हाईवे किनारे झाड़ी में डाल दी। इसके बाद बाइक एक दोस्त के घर खड़ी कर दी।
आवेश और शौक में अपराध कर रहे युवा : हेमा खन्ना
टीन एजर्स क्षणिक आवेश और अपने शौक पूरे करने को अपराध की राह पकड़ रहे हैं। शुरू में बच्चों की जरूरतें पूरी करने वाले अभिभावक जब उन्हें बिगड़ता देखकर सख्ती करते हैं और उनके खर्चे पर रोक लगाते हैं तो युवा हिंसक व्यवहार करने लगते हैं। उन्हें लगता है कि अपनों को भी उनकी फिक्र नहीं है। वहीं दूसरे दोस्तों का स्टाइलिश जीवन भी उन्हें कचोटता है। वह बिना परिणाम सोचे अपराध कर बैठते हैं। यह मामला भी युवाओं के इसी नकारात्मक पक्ष की बानगी है।