स्मैक की खास किस्म ने फतेहगंज पश्चिमी को बनाया चर्चित मंडी
बाहरी तस्कर पकड़ने पर बताते हैं यहां बनी स्मैक को खास
दूसरे प्रांतों से अफीम लाकर फतेहगंज पश्चिमी में करते हैं तैयार
बरेली। फतेहगंज पश्चिमी कस्बे को तस्करों ने स्मैक की बड़ी मंडी बना दिया है। दूरदराज के स्मैक तस्कर पकड़े जाने पर यह स्वीकार भी करते हैं कि यहां की स्मैक की खास किस्म की होती है, इसलिए उसकी डिमांड ज्यादा है। तस्कर पश्चिम बंगाल, राजस्थान, बिहार और झारखंड आदि स्थानों से अफीम और कच्ची स्मैक लाकर उसे कुछ केमिकल के साथ परिष्कृत करके स्मैक की विशेष किस्म तैयार करते हैं। यहां की स्मैक की दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में सबसे ज्यादा डिमांड है।
स्थानीय स्मैक तस्करों का जाल दूसरे प्रांतों तक फैला है। वह पश्चिमी बंगाल, राजस्थान, बिहार और झारखंड से कच्ची स्मैक और अफीम की खेप मंगाते हैं। इसमें केमिकल मिलाकर बेहतरीन किस्म की स्मैक तैयार करते हैं। कस्बे के छोटे तस्कर इस स्मैक को कस्बे के साथ ही जिले भर में खपाते हैं। इसमें स्थानीय स्कूल-कॉलेज भी बिक्री के अड्डे हैं। यहां पुड़िया बनाकर बेची जाती है। साथ ही बड़े तस्कर दिल्ली, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा आदि प्रांतों में इसे खपाते हैं। कई बार तो खुद बाहरी एजेंट आकर अपनी जिम्मेदारी पर यहां से माल की डिलीवरी ले जाते हैं। देहरादून और रुड़की के छात्र भी यहीं से स्मैक खरीदने आते हैं। देहरादून के कई तस्कर यहां से स्मैक खरीदने के दौरान पकड़ गए हैं। उनके मुताबिक, फतेहगंज पश्चिमी की स्मैक जैसी गुणवत्ता कहीं और की स्मैक में नही होती है। एक साल पहले पश्चिम बंगाल के तस्कर से अस्सी लाख की स्मैक दिल्ली पुलिस ने पकड़ी थी। पकड़े गए तस्कर ने बताया था कि वह फतेहगंज पश्चिमी से ही खेप लेकर आया था। पुलिस भी इस धंधे में खूब खेल करती है। स्मैक खरीदने आए तस्करों को पुलिस पकड़ती है तो उनसे सेटिंग करके कम माल लगाकर जेल भेजती है। स्मैक बेचने वाले स्थानीय तस्करों पर हाथ डालने की बजाय चुप्पी साध लेती है।