बरेली। पीपुल फॉर एनिमल के रेस्क्यू प्रभारी धीरज पाठक के खिलाफ राजस्थानी महिलाओं की ओर से दर्ज केस को खत्म कराने की मांग करने एसएसपी के पास गए नेताओं को बैरंग लौटना पड़ा। एसएसपी ने साफ कहा कि छापा मारने या मारपीट करने का अधिकार किसी संगठन को नहीं है। दोनों ओर से दर्ज मामलों को वरिष्ठ अधिकारी खुद देख रहे हैं, नियमानुसार कार्रवाई कराएंगे।
विश्व हिंदू परिषद के महानगर अध्यक्ष आशु अग्रवाल, अजय राज शर्मा और सतीश यादव ने बुधवार दोपहर एसएसपी से उनके दफ्तर में मुलाकात की। कहा कि धीरज पाठक पर मामला इंस्पेक्टर कैंट ने गलत तरीके से लिखवाया है। धीरज पशु प्रेमी हैं और डीएम ने उनकी सेवा को देखते हुए खुद उन्हें स्कूटर दिलाया है। सतीश ने कहा कि उनका संगठन गोवंश की रक्षा और लावारिस जख्मी पशुओं को रेस्क्यू कर उपचार करता है। मारपीट के वक्त धीरज वहां थे ही नहीं। इसलिए रिपोर्ट निरस्त कर दी जाए।
एसएसपी ने इन लोगों को आड़े हाथ ले लिया। कहा कि दोनों ओर से आरोप लग रहे थे। इसीलिए सीओ को भेजा था। साथ में एसडीएम भी गए थे। तब वहां हर स्तर से की गई जांच और तहरीर के बाद जो स्थिति मिली, उसके मुताबिक रिपोर्ट लिखी गई। अगर कोई पशु तस्करी कर रहा है तो नियमानुसार उसकी शिकायत पुलिस या प्रशासन के अधिकारियों से की जानी चाहिए। खुद झगड़ा बढ़ाकर महिलाओं को मारने पीटने का का अधिकार किसी को नहीं है। आशु अग्रवाल ने जब कहा कि राजस्थानी लोग पशु तस्करी में शामिल रहते हैं तो एसएसपी बोले कि आप शिकायत करिए, वह जांच कराएंगे।