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मुठभेड़ में दबोचा 25 हजार का इनामी बदमाश

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भमोरा/बरेली। भमोरा पुलिस ने शनिवार रात मुठभेड़ के बाद मुरादाबाद के 25 हजार के इनामी बदमाश आमीन को पकड़ने का दावा किया है। पुलिस के मुताबिक शनिवार देर रात हुई मुठभेड़ में उसके बांये पैर में गोली लग गई, जबकि दूसरा बदमाश भाग निकला। आमीन पर लूट के दो मामले भमोरा थाने में दर्ज हैं। जबकि एक मुकदमा फतेहगढ़ और दूसरा कन्नौज में दर्ज है।
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थाना पुलिस को शनिवार देर रात अलीगंज रम्पुरा मोड़ से राजूपुर जाने वाले रास्ते पर बदमाश होने की सूचना मिली। एसओ श्याम सिंह यादव के मुताबिक वे दरोगा विनय कुमार, विपिन कुमार मलिक और चार सिपाही लेकर मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बदमाशों को आता देख रुकने का इशारा किया तो बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक बदमाश के बायें पैर में गोली छूकर निकल गई। वह वहीं गिर गया, लेकिन दूसरा बदमाश भाग निकला। पूछताछ में पता लगा कि पकड़ा गया बदमाश मुरादाबाद के भोजपुर थाने के गांव गुलपड़ी का निवासी आमीन पुत्र इलियास था। जबकि फरार बदमाश अलीगंज थाने के गैनी गांव निवासी पप्पू था। आमीन के पास से पुलिस को 315 बोर का तमंचा व दो कारतूस मिले। उसे रात में ही जिला अस्पताल लाया गया। यहां से दोपहर में कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। भागे बदमाश पप्पू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने देर रात गैनी गांव में दबिश दी, लेकिन वो नहीं मिला। एसपी देहात डॉ. संसार सिंह ने बताया कि पप्पू को जल्दी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। आमीन का आगे का इलाज जेल अस्पताल में ही होगा।
पहले भी पैर से छूकर निकली पुलिस की गोली
पहले भी पुलिस इसी तरह बदमाशों के पैर में घुटने के पास गोली मारती रही है। इसमें कभी दायें और कभी बायें घुटने को पुलिस की गोली ने निशाना बनाया। 31 जून को सुभाष नगर थाना क्षेत्र के विकास उर्फ गोलू को फतेहगंज पश्चिमी थाना पुलिस ने अपने इलाके में बांये पैर में गोली मारी। 22 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने महेशपुरा फाटक के पास मुठभेड़ दिखाकर 50 हजार के ईनामी बदमाश मुरादाबाद के देवशरण को पकड़ा। उसके भी बांये पैर में गोली मारी गई। इन मुठभेड़ों पर खुद घायल बदमाश ही सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि आमीन के मामले में स्थिति हटकर थी। उसने घटना के बारे में कुछ भी कहने से इंकार किया। बोला कि मैं भूखा हूं। खा पीकर ही आवाज निकलेगी। हालांकि मुठभेड़ को लेकर इलाके के लोगों में संशय की स्थिति थी। घटनास्थल के पास बने मंदिर के पुजारी पोथीराम ने किसी फायर की आवाज नहीं सुनी।
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