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कानूनगो की रिश्वतखोरी साहब टाल गए.. एंटी करप्शन ने नाप दिया

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बरेली। किसानों और आम लोगों के बीच कानूनगो ओमपाल की छवि बेहद रिश्वतखोर कर्मचारी के तौर पर थी। पंद्रह दिन पहले ही एक किसान ने सौ रुपये की रिश्वत लेते ओमपाल का वीडियो बनाकर अफसरों को सौंपा था। एसडीएम ने इस वीडियो की जांच तहसीलदार के सुपुर्द कर दी और तहसीलदार इसे दबाकर बैठ गए। इस बीच शिकायतकर्ता को बयान दर्ज कराने के लिए तक नहीं बुलाया गया। शनिवार को ओमपाल को एंटी करप्शन ने रिश्वत लेते हुए दबोचा तो अफसरों के लिए इस घटना पर कुछ बोलना तक मुश्किल हो गया।
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ओमपाल के खिलाफ तीन सितंबर को अतरछेड़ी गांव में रहने वाले किसान रंजीत ठाकुर ने अधिकारियों से बाकायदा शिकायत की थी। रंजीत अफसरों को वीडियो भी सौंपा था जिसमें कानूनगो ओमपाल सौ रुपये की रिश्वत लेते दिख रहा था। रंजीत की शिकायत थी कि हिस्सा फाटा के मामले में ओमपाल उसे काफी समय से परेशान कर रहा था। पहले भी उससे वसूली कर चुका था। इसके बावजूद कागज देते वक्त फिर खर्चा देने की बात कहते हुए सौ रुपये ले लिए। रंजीत की शिकायत पर एसडीएम ने तहसीलदार को जांच सौंप दी थी लेकिन तहसीलदार ने जांच के नाम पर कुछ नहीं किया। अब तहसील का ही स्टाफ दबी जुबान से कह रहा है कि रंजीत की शिकायत पर कार्रवाई हुई होती तो यह नौबत नहीं आती।
फिर भी अफसरों का लाड़ला.. दे रखे थे कमाई वाले दो-दो हल्के
किसानों के साथ बदमिजाजी के लिए जाना जाने वाला कानूनगो ओमपाल अपने अफसरों का लाड़ला था। अफसरों ने उसे कमाई वाले इलाके की पहचान रखने वाले बल्लिया और सेंधा समेत दो हल्के दे रखे थे। उसके खिलाफ अफसरों के पास पहले से कई शिकायतें थीं, 15 दिन पहले ही किसान रंजीत ने सौ रुपये की रिश्वत लेते हुए उसका वीडियो अफसरों को दिया था लेकिन इसके बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई करना तो दूर, अफसरों ने अतिरिक्त हल्के से भी नहीं हटाया। अगले ही साल ओमपाल को रिटायर होना था लेकिन रिटायर होने से पहले ही वह जेल पहुंच गया।
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