भमोरा। पुलिस की बेपरवाही से दुष्कर्म की कोशिश के बाद किशोरी के आत्महत्या करने के बाद सिस्टम जाग गया। एसपी देहात की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने तहरीर लिखाने के नाम पर बाप-बेटी को थाने से लौटा देने वाले सरदार नगर चौकी प्रभारी को सस्पेंड करने के साथ दुष्कर्म की कोशिश के बजाय मारपीट की तहरीर मांगने वाले मुंशी को भी लाइन हाजिर कर दिया। थाने की पुलिस ने इस बीच दोनों शोहदों के साथ दरोगा के बीडीसी सदस्य बेटे और रोजगार सेवक को भी जेल भेज दिया है।
किशोरी ने अपने साथ हुई शोहदों की हरकत और पुलिस के उसे गंभीरता से न लेने से आहत होकर 16 सितंबर को घर में ही फंदा लगाकर जान दे दी थी। दरवाजा तोड़कर शव निकाला गया। सीओ आंवला तक गांव पहुंचे थे। इसके बाद पुलिस एक्शन में आई और एक और रिपोर्ट लिख ली। रात में ही धरपकड़ कर ली। दुष्कर्म की कोशिश के आरोपी धीर सिंह और दुर्वेश के साथ ही दूसरे मामले में ताने देने के आरोपी बीडीसी सदस्य अशोक व उसके भाई रमेश राजपूत को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को दोनों को जेल भेज दिया गया। साथ ही एसएसपी ने एसपी देहात से पूरे मामले में रिपोर्ट देने को कहा। इसमें लापरवाही होने की पुष्टि हुई। इसके बाद सरदार नगर चौकी के प्रभारी एसआई बलवीर सिंह को निलंबत और मुंशी संदीप को लाइन हाजिर कर दिया गया।
दरोगा ने टहलाया और मुंशी ने हड़काया था
पीड़ित किशोरी के पिता के आरोपों पर अफसरों ने जांच के बाद जो कार्रवाई की उसमें दरोगा और मुंशी नप गए। बताते हैं कि रात दस बजे पीड़ित किशोरी अपने पिता के साथ पहले चौकी पहुंचीं। वहां से पता लगा कि चौकी प्रभारी थाने में हैं तो ये लोग थाने आए। पहले तो दरोगा ने इनकी बात को गंभीरता से सुना ही नहीं, बाद में लिखित तहरीर लाने को कहा। रात साढ़े दस बजे किसान पिता और अनपढ़ बेटी थाने के बाहर दूर तक भटके पर न तो कागज और न ही कोई तहरीर लिखने वाला मिला। दरोगा के सख्त मिजाज को पहले ही भांप चुके दोनों लोग घर चले आए। बाद में वूमेन पावर हेल्पलाइन के सदस्यों के साथ थाने पहुंचे तो मुंशी संदीप अड़ गया कि मारपीट की तहरीर दो। शाम तक परेशान करने के बाद उसने छेड़छाड़ और मारपीट की धारा में रिपोर्ट लिखी।
दरोगा के बेटों का हाथ सिर पर होने से बढ़ा था हौसला
दोनों शोहदे गांव निवासी दरोगा के घर काम करते और ज्यादा वक्त गुजारते थे। ये दरोगा हरदोई जिले में तैनात बताए जा रहे हैं। इन्हीं के बेटे में से एक रोजगार सेवक और दूसरा बीडीसी सदस्य है। दोनों आरोपी घटना के बाद से इन लोगों ने कहीं छुपा दिए थे और किशोरी व उसके परिवार को धमका रहे थे। आरोप है कि इस तरह के ताने दिए जा रहे थे कि तुम उन दोनों का कुछ नहीं कर पाओगे, इसलिए फैसला कर लो। पुलिस के उपेेक्षित रवैये से किशोरी और उसके परिवार को भी लग रहा था कि आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाएगी, इसी वजह से निराशा में किशोरी ने जान दे दी।
जब बेटी ही चली गई तो कार्रवाई का क्या फायदा
पोस्टमार्टम हाउस पर निराश बैठे किशोरी के पिता सुबक रहे थे। वह कह रहे थे कि बेटी के जीतेजी पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अब पुलिस ने इतनी जल्दी दूसरा मामला भी दर्ज करके चारों आरोपियों को पकड़ लिया। काश उनकी बेटी के सामने ही यह कार्रवाई हो जाती तो शायद उसके जान देने की नौबत नहीं आती।
ये था मामला
किशोरी के साथ 11 सितंबर को खेत पर गांव के ही दो युवकों धीर सिंह और दुर्वेश ने दुष्कर्म की कोशिश की थी। विरोध पर मारपीट की। दरोगा ने तहरीर लिखकर लाने की बात कहकर टाल दिया। 12 सितंबर को पिता ने वूमेन हेल्पलाइन पर शिकायत की तो वहां से आए सदस्यों के साथ पिता पुत्री फिर थाने आए। तब मुंशी मारपीट की तहरीर देने पर अड़ा गया। बाद में छेड़छाड़ की रिपोर्ट लिखी। मेडिकल परीक्षण मुश्किल से हुआ, बयान भी नहीं हो सके थे।