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हंसी-मुस्कराहट के पीछे छिपी क्रूरता देखी तो दहल गए बुजुर्ग जादौ सिंह

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बरेली। हंसते-मुस्कराते चेहरों के पीछे कभी-कभी कितनी क्रूरता छिपी होती है, करीब 80 साल के रिटायर्ड लेक्चरर जादौ सिंह को यह उम्र के आखिरी पड़ाव पर समझ में आया। शादी करने के बजाय अपनी भांजी को बेटी की तरह पाल-पोसकर बड़ा करने और अपनी सारी संपत्ति उसकी झोली में डालकर उसकी शादी करने के बाद गुजरते वक्त के साथ जादौ सिंह समझ पाए कि वह तो उन्हें सिर्फ एटीएम समझती थी। उनकी पेंशन और बैंक एकाउंट में जमा पैसा भी उसे चाहिए। इसके बाद वितृष्णा से भरे जादौ सिंह ने उस एटीएम कार्ड को ब्लॉक करा दिया जो भांजी ने छीन रखा था। इसके बाद तो उन पर कहर टूट पड़ा। उन्हें बंधक बनाकर पीटना शुरू कर दिया गया। दो हफ्ते बाद किसी तरह जान बचाकर भागने में कामयाब हुए जादौ सिंह तीन दिन इधर-उधर भटकने के बाद शहर कोतवाली पहुंचे। पुलिस ने फिलहाल मेडिकल परीक्षण कराकर उन्हें वृद्धाश्रम में भेज दिया है।
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कोतवाली में शुक्रवार सुबह ही एक बुजुर्ग वाकर के सहारे घिसटते हुए पहुंचे। उन्होंने अपनी पहचान बदायूं के गांव मोजमपुर छज्जू में रहने वाले रिटायर्ड लेक्चरर जादौ सिंह के तौर पर बताई। बताया कि वह दातागंज के स्थित गंगादीन इंटर कॉलेज में अर्थशास्त्र पढ़ाते थे। उन्होंने शादी नहीं की लिहाजा उनका अपना कोई परिवार नहीं है। जब उनकी भांजी छोटी थी तब उसे ही अपनी बेटी मानकर अपने घर ले आए थे। उसे पढ़ा-लिखाकर बड़ा किया। उसकी शादी की तो तमाम संपत्ति के साथ एक घर भी दिया। भांजी और उसका पति दोनों शिक्षक हैं। जादौ सिंह ने बताया कि अब उनकी भांजी और उसका परिवार ही उन पर अत्याचार कर रहा है, वजह यह है कि अब उनके पास उसे देने के लिए कुछ नहीं बचा। भांजी ने उनके पेंशन खाते की चेक बुक और एटीएम कार्ड तक छीन लिया था। पैसा खाते में आते ही गायब होने लगा। कुछ दिन पहले उन्होंने एटीएम कार्ड ब्लॉक करा दिया तो पूरा उनसे मारपीट करने लगा। दो हफ्तों से भांजी के परिवार ने उन्हें बदायूं की दुर्गा कॉलोनी में बंधक बना रखा था। उनके साथ बुरी तरह मारपीट भी करते थे। तीन दिन पहले वह किसी तरह छिपकर निकल आए। दो दिन पड़ोस के शेखूपुर में छिपे रहे फिर शुक्रवार को बस से आगरा पहुंचे। वहां से देर रात बस से बरेली पुराना रोडवेज पहुंचे जहां रात बेंच पर काटने के बाद सुबह कोतवाली पहुंचे।
खूब बिलखे.. अब कुछ बचा नही इसलिए रिश्तेदार भी नहीं पहचानते
अस्सी साल के बुजुर्ग ने कोतवाली में बिलखते हुए बताया कि अब उनके पास पेंशन के सिवा कुछ नहीं बचा। सब कुछ भांजी और उसके परिवार को दे दिया। इस वजह से बाकी रिश्तेदारों ने भी उनसे मुंह मोड़ लिया। बताया कि रिश्तेदार बोलते हैं कि सब कुछ तो तुमने भांजी को दे दिया। हमारे लिए क्या बचा। हम क्यों मदद करें।
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