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लो भइया सारे दावे हवाहवाई!

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बरेली। सत्संगी परिवार ने पुलिस अफसरों पर एक और सवाल खड़ा किया है। सत्संगी परिवार का कहना है कि पुलिस ने इस मर्डर केस की छानबीन के नाम पर सिर्फ हवा में हाथ-पांव चलाने के अलावा कुछ नहीं किया। अनुराग भागवानी के बारे में पहला सुराग उन्होंने पुलिस को दिया था। इसी के बाद पुलिस ने उसे पकड़ा लेकिन फिर ऐसी कहानी बना दी जिससे उन्हीं लोगों को शर्मिंदगी झेलनी पड़ रही है।
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मृतक नीरज सत्संगी के छोटे भाई संजय सत्संगी का कहना है कि फुटेज, फिंगरप्रिंट जैसे सारे साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस घटना के बाद अंधेरे में तीर चला रही थी। 26 जुलाई को उन्हीं ने पड़ोसियों से मिली जानकारी के मुताबिक इंस्पेक्टर प्रेमनगर को हत्यारे का क्लू दिया था। कहा था कि पहले पड़ोस में रहने वाले ऑटो ड्राइवर का चेहरा फुटेज के आरोपी से मिलता हुआ लग रहा है। इसके बाद ही पुलिस ने अनुराग के बारे में जानकारी करके उसकी तलाश शुरू कर दी।
संजय का कहना था कि पुलिस ने अनुराग को कब और कहां से पकड़ा, उन्हें इसके बारे में भी सही जानकारी नहीं दी गई। हो सकता है कि उनकी ओर से क्लू मिलने के बाद ही पुलिस ने आरोपी को कब्जे में ले लिया हो और खुलासे की कहानी बनाने के लिए उस पर दबाव डाला हो। पुलिस ने 30 जुलाई की रात उनका आरोपी से सामना कराया था। तब आरोपी वही रटी रटाई कहानी सुना रहा था जो उन्हें पुलिस ने बताई थी। उन्होंने जो सवाल किए, उनके ठोस जवाब भी अनुराग पर नहीं थे। ऐसे में उन्हें सही से ये भी नहीं पता कि अनुराग ही कातिल है या कोई और हत्या करके चला गया। पुलिस के पास जो फुटेज है, उससे मिलता हुआ अनुराग का चेहरा है, इसके अलावा दूसरे क्या साक्ष्य हैं, वे नहीं जानते।
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