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बेकसूर रुचि और उसकी बेटियों को मिली सबसे बड़ी सजा

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बरेली। सत्संगी दंपती की तो खैर बेहद दर्दनाक ढंग से कहानी ही खत्म हो गई और उनका हत्यारोपी अनुराग भागवानी भी जेल चला गया मगर भागवानी की पत्नी रुचि और बेटियों की जिंदगी बगैर कोई कसूर किए ही तबाह हो गई। तमाम सालों से अपनी बेटियों का भविष्य संवारने के लिए रात-दिन मेहनत-मशक्कत में जुटी रहने वाली रुचि को पिछले तीन दिनों में हालात ने ऐसे उठा-उठाकर पटका कि वह अपनी सुधबुध ही खो बैठी। बृहस्पतिवार दोपहर पुलिस की हिरासत से छूटी तो घंटों फफकती रही। मासूम बेटियां उसे संभालने की कोशिश करती रहीं लेकिन उसके आंसू रुकने में नहीं आए।
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रुचि को पहला झटका तब लगा जब आगरा में रहने वाली उसकी ननद ने उसे फोन पर एक्सीडेंट में अनुराग की रीढ़ की हड्डी टूटने की खबर दी। तंगहाली में अनुराग के इलाज कराने के तनाव में डूबी वह आगरा पहुंची, वहां से एंबुलेंस में अनुराग को लेकर लौटते वक्त जब रास्ते में पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया तो वह और ज्यादा सकते में आ गई। बरेली आकर ठीक से पता लगा कि अनुराग के साथ उसे सत्संगी दंपती की हत्या के मामले में हिरासत में लिया गया है। पुलिस अनुराग से पूछताछ करती रही लेकिन इस बीच उसे भी महिला थाने में हिरासत में रखा गया। इस बीच रूपा सत्संगी से अपने पति के संबंधों और पांच लाख रुपये के लिए दो लोगों की हत्या जैसी बातों ने रुचि को हिलाकर रख दिया।
बृहस्पतिवार की दोपहर पुलिस के छोड़ने के बाद घर पहुंची रुचि काफी सहमी हुई थी और लगातार फफक रही थी। संक्षिप्त से बातचीत में रुचि ने इतना ही कहा कि सत्संगी परिवार से अनुराग का करीबी संबंध था मगर अवैध संबंध जैसी कोई बात नहीं थी। ऐसा होता तो सबसे पहले उसे ही यह बात पता लगती। रुचि ने कहा कि अगर अनुराग ने हत्या की भी है तो उसे इसकी वजह नहीं पता। पति ने तो उसे यह बताया था कि गाड़ी चलाते वक्त एक्सीडेंट में उसकी रीढ़ की हड्डी टूटी है। बता दें कि अनुराग का खटारा ऑटो अक्सर खराब खड़ा रहने की वजह से परिवार चलाने की सारी जिम्मेदारी रुचि के ही ऊपर थी। वह ब्यूटी पार्लर का काम करने के अलावा कुछ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर जैसे-तैसे परिवार का गुजारा चला रही थी।
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काश.. रुचि के साथ पुलिस ने कुछ हमदर्दी दिखाई होती
पति को जेल भेजने के बाद भी रात भर रखा थाने में
सत्संगी दंपती हत्याकांड के आरोपी अनुराग भागवानी के पकड़ में आ जाने के बावजूद पुलिस ने रुचि को भी हिरासत में ले लिया जबकि यह साफ था कि हत्या में उसकी कोई भूमिका नहीं है। इसके बाद भी अनुराग को जेल भेजे जाने तक उसे महिला थाने में हिरासत में रखा गया। पुलिस ने इस बीच यह भी देखने की कोशिश नहीं की कि अपने मां-बाप की गैरमौजूदगी में उनकी दो बेटियां किस हाल में गुजर-बसर कर रही हैं। हद तो तब हो गई जब बुधवार को अनुराग भागवानी को जेल भेज दिए जाने के बाद भी रुचि को नहीं छोड़ा गया। बुधवार की रात भी उसे महिला थाने में ही रखा गया और फिर बृहस्पतिवार को दोपहर के करीब उसे रिहाई नसीब हो पाई।

शरीफ दिखता था अनुराग
राजेंद्र सी ब्लॉक में किराए के घर में रहने वाले अनुराग को जो लोग कॉलोनी में नहीं भी जानते थे, वे अखबारों और चैनल में उसका चेहरा देखकर उसे पहचान गए। अमर उजाला टीम मौके पर पहुंची तो पड़ोसी घर के बाहर एकत्र हो गए। पड़ोसियों ने बताया कि अनुराग अप्रैल में ही परिवार समेत यहां आया था। वह दिन में अक्सर बाहर रहता था और सुबह शाम ही उसे देख पाते थे। चार महीनों में उसका व्यवहार या चाल चलन कभी गड़बड़ नहीं लगा। अब दो लोगों की हत्या में उसका हाथ होने की जानकारी उन्हें मीडिया के जरिये मिली तो हैरान रह गए। वह बहुत शरीफ दिखता था पर ऐसा काम करेगा, ये किसी ने नहीं सोचा था।
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