बरेली। खस्ताहाल मकान की मरम्मत को लिया लोन गरीब के लिए महंगा पड़ गया। कंपनी के खेल से उसका मकान ही कुर्क होने की नौबत आ गई। एडीएम मामले को समझकर दोनों पक्षों को तलब किया तो कंपनी कर्मचारियों ने उन्हें ही गुमराह कर दिया। इस पर एडीएम ने कंपनी को फटकार लगाकर मामले का सेटलमेंट कराकर गरीब का मकान बचाया।
चौपुला पुल के पास रहने वाले विनोद कुमार छोटा-मोटा काम करके गुजारा कर रहे हैं। उनका मकान गिरने की हालत में पहुंच गया तो मरम्मत के लिए उन्होंने एक हाउस फाइनेंस कंपनी से तीन लाख रुपये का कर्ज लिया। इसके बदले कंपनी ने मकान के कागज गिरवी रखकर 15 हजार रुपये लोन प्रोसेसिंग के नाम पर काटकर 2.85 लाख रुपये थमा दिए। विनोद का कहना कि इसके बाद उन्होंने पांच-आठ हजार रुपये करके कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति को करीब 80 हजार रुपये दे दिए। कई किस्तें सीधे कंपनी में भी जमा कीं। मगर कंपनी ने कर्ज न करने का आरोप लगाकर तत्कालीन एडीएम सिटी ओपी वर्मा के यहां केस दायर करके कुर्की आदेश जारी करा लिया। उनके ट्रांसफर के बाद जब यह प्रकरण वर्तमान एडीएम महेंद्र कुमार के समक्ष पहुंचा तो उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों और विनोद कुमार को तलब कर लिया। इस दौरान विनोेद सिर्फ तीन किस्तों की रसीद ही दिखा सके लेकिन कंपनी के कर्मचारी उन्हें मानने को तैयार ही नहीं हुए। इसके बाद एडीएम ने फटकार लगाकर कंपनी पर कार्रवाई की चेतावनी दी तो संचालक 3.60 लाख के बजाय 2.60 लाख रुपये लेकर मामला निपटाने को तैयार हो गए।
एक हाउस लोन कंपनी से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया था। कंपनी का स्टाफ झूठ बोलने की कोशिश कर रहा था। दोनों पक्षों को बुलाकर उन्हें सुना गया है। मामले को सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है। -महेंद्र कुमार, एडीएम सिटी