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डॉक्टर साहब ! लगता है अब नेता जी भी नहीं बचा पाएंगे

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पीलीभीत। लाश को वेंटिलेटर पर रखकर इलाज के नाम पर एक लाख रुपये ऐंठने के मामले में निजी अस्पताल संचालक पर शिकंजा कसता जा रहा है। अस्पताल संचालक पर कार्रवाई को लेकर डीएम ऑफिस में शनिवार रात करीब डेढ़ बजे तक मंथन चलता रहा। डॉक्टरों के तीन सदस्यीय पैनल की जांच रिपोर्ट देखने के बाद डीएम ने कम तथ्यों को शामिल करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने रविवार सुबह एक बार फिर सीएमओ समेत स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को तलब कर लिया। इधर, कार्रवाई से बचने के लिए अस्पताल संचालक सत्ताधारी नेताओं की शरण में है। इसके अलावा उनका एक दूसरा नेटवर्क भी है, जिसके सहारे भी वह प्रशासन पर दबाव बनाने पर लगे हुए हैं।
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पूरनपुर के ग्राम सिकराना निवासी राजू को सात जून की रात करीब एक बजे शहर के गौहनिया चौराहा स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टर ने उसकी हालत बेहद गंभीर बताते हुए तुरंत ही 40 हजार रुपये जमा कराए और फिर उसे वेंटिलेटर पर रख दिया। कुछ देर बाद फिर घरवालों को हालत नाजुक बताकर 72 घंटे तक चिकित्सकीय निगरानी में रखने की बात कही और फिर गंभीर बताकर 60 हजार रुपये और जमा करा लिए। आठ जून की सुबह नौ बजे राजू की मौत का पता चलने पर घरवालों ने डॉक्टर से छुट्टी करने के लिए कहा तो उन्होंने 72 घंटे पूरे होने पर ही डिस्चार्ज करने की बात कही। घरवालों ने विरोध किया तो हायर सेंटर के लिए रेफर लेटर बनाकर आठ जून को पूर्वाह्न 11.30 बजे राजू के शव को उनके सुपुर्द कर दिया। घरवालों ने शाम करीब साढ़े पांच बजे राजू के शव का पोस्टमार्टम कराया तो रिपोर्ट में राजू की मौत 12 से 24 घंटे पहले होने की बात कही गई। डीएम के निर्देश पर सीएमओ ने इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय डॉक्टरों का पैनल गठित किया। शुक्रवार को आरोपी डॉक्टर के बयान दर्ज किए। शनिवार को जांच रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई। इधर, शासन स्तर तक मामला पहुंचने के बाद से अफसर हकरत में दिखे। पैनल की जांच रिपोर्ट में भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुष्टि की गई। इसमें माना गया कि लाश को करीब छह घंटे तक वेंटिलेटर पर रखा गया।
शनिवार शाम पैनल की जांच रिपोट के साथ सीएमओ की ओर से भेजी गई जांच आख्या का डीएम ने निरीक्षण किया तो रिपोर्ट को बेहद सतही पाकर उनका पारा चढ़ गया। डीएम ने तुरंत ही सीएमओ को तलब कर लिया। रात करीब डेढ़ बजे तक डीएम कार्यालय में कार्रवाई को लेकर मंथन चला। इसके बाद रविवार सुबह डीएम ने फिर सीएमओ को तलब कर लिया। उन्होंने रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों को नाकाफी बताते हुए सीएमओ की जमकर क्लास ली। इसके बाद जांच रिपोर्ट को नए सिरे से तैयार कराया गया। पैनल ने पहले सिर्फ आठ लाइन में अपनी रिपोर्ट दी थी। उसमें निष्कर्ष के तौर पर सिर्फ यह लिखा गया था कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर के बयान और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अवलोकन किया गया। अतएव यह मृत्यु आठ जून को सुबह साढ़े पांच बजे से पूर्व होना संभव है। इस पर डीएम ने आपत्ति की। उन्होंने कहा कि पैनल पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सहमत हैं, सिर्फ इतना लिखने से काम नहीं चलेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए कि पैनल में शामिल डॉक्टर क्यों सहमत हैं, उसे कारण सहित लिखें। इसके बाद सात पन्नों की रिपोर्ट बनाई गई।
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सीएमओ ने डीएम को यह भी बताया कि पहले भी इस अस्पताल की शिकायतें मिली हैं। आरोपी डॉक्टर की एमसीएच की डिग्री पर संदेह भी जताया गया था, तब वह डॉक्टर को डिग्री की जांच पूरी न होने तक प्रैक्टिस न करने के आदेश दे चुकी हैं। इसके बाद भी डॉक्टर न केवल प्रैक्टिस करता रहा बल्कि आपरेशन भी करता रहा। इसके बाद सीएमओ ने इन सारे तथ्यों को शामिल करते हुए दूसरी जांच आख्या तैयार की। उसमें साफतौर पर लिखा कि वह डॉक्टर के खिलाफ विधिक कार्रवाई की संस्तुति करती हैं।

गायब कर दिया गया डॉक्टर को प्रैक्टिस से रोकने का पत्र
सीएमओ ने डॉक्टर की डिग्री को लेकर शिकायत मिलने पर प्रैक्टिस बंद करने और सर्जरी न करने का आदेश तो जारी कर दिया। इसका लेटर भी तैयार करा दिया, लेकिन यह लेटर डॉक्टर को रिसीव ही नहीं कराया गया। बताया जाता है कि सीएमओ कार्यालय के एक बाबू ने ही यह पत्र गायब कर दिया। यह मामला भी आज डीएम के संज्ञान में आया।

सत्ताधारी दल के नेताओं की शरण में है आरोपी डॉक्टर
आरोपी डॉक्टर ने इस मुसीबत से निकलने के लिए अब अपनी पहुंच वाले सत्ताधारी नेताओं से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। बताते हैं कि डॉक्टर के एक केंद्रीय मंत्री समेत लखनऊ के कुछ नेताओं से अच्छे संबंध हैं। प्रदेश कमेटी के दो पदाधिकारी रविवार को डॉक्टर की पैरवी में यहां आए भी थे। इसके अलावा एक महत्वपूर्ण संगठन में डॉक्टर साहब की मजबूत पकड़ है। इधर, जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की बात निकलकर सामने आ रही है। माना जा रहा है अस्पताल सील करने के साथ ही आरोपी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर कराने का अफसर मन बना चुके हैं। लेकिन देखना यह है कि सत्ता और संगठन का दबाव के आगे प्रशासन बैकफुट पर आता है या नहीं।
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डीएम को पैनल द्वारा की गई जांच रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें कुछ खामियां भूलवश रह गईं थी। उन्हें दूर कर जांच आख्या दुरुस्त करके दे दी गई है।
-डॉ. सीमा अग्रवाल, सीएमओ
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