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योगी जी सख्त! मासूम की मौत कई और को भी पड़ेगी भारी

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बरेली। जिला अस्पताल में पांच दिन की मासूम की बेबस मौत अभी और कई अफसरों को भी भारी पड़ सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त तेवर केबाद शासन इस मामले में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता को निलंबित कर चुका है और महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा के खिलाफ भी विभागीय जांच चल रही है। इसी बीच शुक्रवार को अचानक यहां पहुंचे स्वास्थ्य विभाग के निदेशक डॉ. रुकमकेश जिला अस्पताल में एक-एक कर सभी अधिकारियों और स्टाफ का बयान दर्ज किए। बताया गया कि निदेशक ने गोपनीय रिपोर्ट तैयार की है जो सीधे उच्चाधिकारियों को सौंपी जाएगी।
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लखनऊ से आए निदेशक डॉ. रुकमकेश ने जिला अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में इस प्रकरण से जुड़े सभी एक-एक अधिकारी, डॉक्टर और स्टाफ को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए। इस दौरान ओटी में किसी के भी प्रवेश पर सख्त मनाही कर दी गई थी। बयान दर्ज कराने यहां पहुंचने वालों में सस्पेंड सीएमएस डॉ. केएस गुप्ता, मौजूदा सीएमएस डॉ. एके आर्या, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका सक्सेना, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. करमेंद्र के अलावा चाइल्ड यूनिट की नर्स और अन्य कर्मचारी शामिल थे। करीब छह घंटे तक ओटी में पूछताछ और बयान दर्ज करने का क्रम जारी रहा। इसके बाद निदेशक ने यहीं बैठकर सभी के बयानों के आधार पर गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जो शासन को सौंपी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री की नाराजगी देखते हुए इस मामले में कई और पर गाज गिरने की संभावना है। इस जांच के बाद सीएमएस समेत कोई भी अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ।

यह था मामला
बिशारतगंज के गोकुलपुरा गांव के रहने वाला किसान योगेंद्र सिंह पांच दिन की बच्ची उर्वशी को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर आए थे। आरोप है कि ओपीडी में बैठे डॉक्टर ने बच्ची को जिला महिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। जब बच्ची के परिजन उसे लेकर महिला अस्पताल गए तो महिला अस्पताल में बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर बच्ची को फिर पुरुष अस्पताल के लिए भेज दिया। इस दौरान बच्ची के पिता और नानी बच्ची को लेकर 3 घंटे तक दोनों अस्पतालों के चक्कर काटते रहे लेकिन बच्ची का इलाज शुरू नहीं हो पाया और उसने अपनी नानी की गोद में ही तड़पकर दम तोड़ दिया था। मामले में बीमार बच्ची के इलाज को लेकर दोनों अस्पतालों के सीएमएस ने एक दूसरे पर आरोप लगाए थे।
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