बरेली। पूरे जिले में सिर्फ 69 चिकित्सकों के हाथ में करीब 35 लाख ग्रामीण आबादी की सेहत बनाए रखने की जिम्मेदारी है। यानी जिले में स्वीकृत पदों के अनुपात में एक तिहाई ही चिकित्सक जिले में कार्य कर रहे हैं। बारिश शुरू होते ही मलेरिया और संक्रामक रोगों की संभावना ज्यादा हो जाती है, इसी वजह से पिछले दिनों सरकार ने सीएमओ और सीएमएस के तबादले रद कर दिए थे। स्वास्थ्य विभाग अफसरों ने डाक्टरों की कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि अगर जिले में पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती जल्द नहीं हुई तो राष्ट्रीय कार्यक्रम संचालन और मलेरिया उन्मूलन करने में समस्या आना तय है।
ग्रामीण इलाकों में हर दिन औसतन 15 हजार से ज्यादा मरीज सरकारी चिकित्सा केंद्रों पर इलाज के लिए आते हैं। ग्रामीण सरकारी अस्पतालों में इन दिनों एक डाक्टर 50 हजार से ज्यादा आबादी की सेहत संभाल रहा है। जिले में स्थिति यह है कि चिकित्सा सुविधा से सुसज्जित स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टर और अन्य स्टाफ भले से ही कम है। जो हैं वे रात में वहां रुकते तक नहीं। जिले में ग्रामीण आबादी 35 लाख से ज्यादा है। जबकि कुल डाक्टर 69 कार्यरत हैं। यानी एक 50 हजार से ज्यादा आबादी पर औसतन एक डाक्टर है। बारिश शुरू होते ही संक्रामक रोग फैलते हैं, इसलिए ओपीडी में मरीजों की तादाद भी बढ़ जाती है। प्रदेश भर में संचारी रोगों की बाढ़ आने से पिछले दिनों सीएमओ स्थानांतरण स्थगित कर दिए थे, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक जिले में डाक्टरों की कमी को दूर करने का कोई उपाय नहीं किया है। इस पर स्थानीय प्रशासन भी चिंतित है। क्योंकि डाक्टरों की कमी के बीच अगर कोई बीमारी फैली तो कैसे नियंत्रित किया जाएगा। प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट सीएमओ डा. विनीत शुक्ला से मांगी तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
सीएमओ डा. शुक्ला ने प्रशासन से कहा है कि जिले में कुल 228 चिकित्सक पद स्वीकृत हैं। जिले में 69 डाक्टर 81 ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं दे रहे हैं। दो दर्जन चिकित्सक अवैध तरीके से गैरहाजिर हैं। जिले से 20 डाक्टर स्थानांतरित हुए, लेकिन उनके बदले में सिर्फ एक मिला है। डाक्टरों की कमी के चलते जिले राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं। पिछले वर्ष मलेरिया का आक्रमण हुआ था, इस बार ऐसी स्थिति आई तो संभालना आसान नहीं होगा। बता दें कि पिछले वर्ष प्रदेश के स्वास्थ्य व चिकित्सा मंत्री सिद्धार्थ सिंह खुद दौरा करने आए थे। बीते वर्ष करीब जिले भर में सवा सौ की जान चली और करीब 37 हजार बीमारी से प्रभावित हुए थे। यानी प्रदेश भर में प्रभावित लोगों से आधे बरेली जिला में बीमारी की चपेट में आए थे। स्वास्थ्य मंत्री ने कई अफसरों पर गाज गिराई थी।
ग्रामीण आबादी 35 लाख
(लगभग)
स्वीकृत डाक्टर पद 228
कुल चिकित्सक 69
चिकित्सा केंद्र 81
हर दिन ओपीडी 17 हजार
(औसतन)