बरेली। नियम कायदों की आड़ लेकर पब्लिक से मोटा जुर्माना वसूलने वाली ट्रैफिक पुलिस रसूखदारों के आगे सारे नियम कायदे भूल जाती है। दोपहर करीब दो बजे एसएसपी दफ्तर के पास खड़ी एक लक्जरी गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस की क्रेन उठाकर पुलिस लाइन ले आई। जब उसे गौर से देखा तो पता चला कि गाड़ी तो विधायक की है। उस पर विधानसभा पास का लोगो भी था। फिर क्या था... नेता जी कहीं नाराज न हो जाएं, इसलिए कार को वहीं ले जाकर रख दिया, जहां से उठाया था। ये देख लोग हैरत में हैं और सवाल भी कर रहे हैं कि कानन क्या सिर्फ आम आदमियों के लिए है।
बताते हैं कि करीब दो बजे एसएसपी दफ्तर से कलेक्ट्रेट जाने वाली रोड पर एक सफेद बोलेरो नो पार्किंग में खड़ी थी। गाड़ी के पीछे के हिस्से में छोटे अक्षरों से विधायक लिखा था। सामने विधानसभा पास का लोगो और लाउडस्पीकर भी लगा था। इस दौरान नो पार्किंग से वाहनों को उठाने वाली क्रेन लेकर घूम रहा ट्रैफिक पुलिस का स्टाफ आया और क्रेन से गाड़ी को उठा लिया। स्टाफ ने तब तक सही से गाड़ी देखी भी नहीं थी विरोध करने के लिए गाड़ी का ड्राइवर या अन्य कोई भी मौजूद नहीं था। टीम इस गाड़ी को पुलिस लाइन ले गई। वहां जाकर पता चला कि गाड़ी तो एक विधायक की है। ‘गलती’ पता चलते ही ट्रैफिक पुलिस ने सुधार कर लिया। थोड़ी ही देर बाद क्रेन ने गाड़ी उसी जगह सड़क से थोड़ा दूर रखकर चली गई। इसके कुछ देर बाद कुछ लोग आए और गाड़ी लेकर चले गए। ये सब देखकर लोग हैरत में थे। चर्चा हो रही थी कि वीआईपी की गाड़ी आसानी से छोड़ दी जाती है और आम वाहन चालकों से मोटा जुर्माना वसूला जाता है। गाड़ी का नंबर एप पर डालने पर मालिक मिस्टर छत्रपाल को दिखाया जा रहा है। चर्चा थी कि यह बहेड़ी विधायक की गाड़ी है। हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
‘मैं आज दिन में बरेली आया था। संजय कम्युनिटी हॉल में एक कार्यक्रम में शामिल हुआ था, लेकिन एसएसपी दफ्तर की तरफ नहीं गया था। जो गाड़ी बताई जा रही है, वो मरी नहीं है’
छत्रपाल सिंह, विधायक बहेड़ी
‘मैं पूरा दिन उर्स में रहा। मेरी जानकारी में ऐसी कोई गाड़ी नहीं आई जिसे उठाया और रखा गया हो। जाहिर है कि अगर गाड़ी उठाई जाती है तो विधिक प्रक्रिया के तहत जुर्माना वसूलने के बाद ही छूटती है। इसलिए इस तरह की कार्रवाई की संभावना नहीं है।’
- सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी ट्रैफिक