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नगर निगम के बुलडोजर ने छीना रोजगार, ठेला संचालक की मौत

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बरेली। गरीबों को निशाने पर लेकर चल रहा निगम का अतिक्रमण हटाओ अभियान एक ठेला संचालक के परिवार पर कहर बनकर टूटा। रोजी रोटी का जरिया ठेला हटने से संचालक की मानसिक हालत इस कदर बिगड़ी की सदमे से उसकी मौत हो गई है। पहले परिवार की आय का जरिया छिना तो अब मुखिया की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
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28 जून को जंक्शन पर नगर निगम का बुलडोजर गरजा था। जंक्शन रोड पर लगे फड़, ठेले, खोखे, खोमचे जैसे अतिक्रमण ध्वस्त किए गए थे। इसमें राजीव कॉलोनी गली नंबर 10 के निवासी 62 वर्षीय रामस्वरूप का ठेला भी था। जिस पर वे करीब 40 वर्षों से राहगीरों को दाल, चावल, सब्जी, रोटी की थाली बेचकर परिवार चला रहे थे। बाद में उनके बच्चे भी इसी ठेले पर पिता का सहयोग करने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने पड़ोस में एक और ठेला लगा लिया। दोनों ठेलों पर उनके चार बच्चे रिंकू, सुरेंद्र, राजेंद्र, रविंद्र कार्य करने लगे। पोती की शादी करने की भी जिम्मेदारी रामस्वरूप पर थी। जिसके लिए वे देर रात तक ठेले पर डटे रहते थे। बुलडोजर गरजा तो वे अतिक्रमण प्रभारी से ठेला बख्शने की गुहार लगाने लगे पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। आंखों के सामने रोजी रोटी पर कहर बरपते देख वे सदमे में चले गए। जिसके चार दिन बाद 2 जुलाई को उनकी मौत हो गई।

अगले दिन फिर पहुंचे तो पुलिस ने भगाया
बेटे रिंकू ने बताया कि पिता की हालत देख नगर निगम से मिले सख्त निर्देश के बावजूद दोबारा ठेला लगाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें भगा दिया। लौटने पर सारा मामला पिता को बताया तो वे उनकी बची खुची उम्मीद भी चली गई। रात भर नींद नहीं आई और सुबह वे बीमार पड़ गए। आनन-फानन में अस्पताल लेकर गए तो वहां आईसीयू में भर्ती कराया। पर हालत में सुधार नहीं हुआ, और दो जुलाई को उनकी मौत हो गई। परिजन का आरोप है कि निगम ने अमीरों के कब्जे छोड़ दिए और गरीबों को उजाड़ दिया।
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