बरेली। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों ने स्मार्ट क्लास संचालन से शिक्षा गुणवत्ता में कई गुना इजाफे का दावा किया है। इस पर बीएसए ने सभी शिक्षकों को अपने दावेे सच साबित करने का नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही यह भी कहा है कि अगर ये दावे सही साबित नहीं हुए तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी। जिसके बाद बड़े-बड़े दावे करने वाले शिक्षक सकते में आ गए हैं।
‘प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम’ के तहत अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के 517 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट क्लास का संचालन शुरू हो गया है। जिसके बाबत शिक्षकों को स्मार्ट क्लास के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया गया है। जिसके बाद उनसे स्मार्ट क्लास से शैक्षिक गुणवत्ता के प्रभाव के बाबत लिखित प्री फीडबैक लिया गया है। जिसमें प्रत्येक शिक्षक ने बड़े-बड़े दावे किए हैं। उन्होंने इस प्रयोग से बच्चों में तकनीकी ज्ञान का विकास होने, छात्र संख्या के बढ़ने, विषय पर पकड़ अच्छी होने, बच्चों की मेमोरी पॉवर बढ़ने, सामूहिक पठन-पाठन के गुर विकसित होने समेत आसानी से प्रत्येक विषय के बारे में ज्ञान अर्जित किए जाने का दावा किया है। जिसकी प्रतिलिपियां बेसिक शिक्षा विभाग के पास सुरक्षित रख ली गईं हैं। जिनके आधार पर तीन माह बाद यानी अक्तूबर में निरीक्षण प्रस्तावित है। ऐसे में बीएसए का कहना है कि अगर, निरीक्षण में संबंधित स्कूल के शिक्षक का दावा सच साबित होता नहीं मिलता है तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई किए जाने की संस्तुति की जाएगी।
ब्लॉक जहां चल रहीं स्मार्ट क्लास
बिथरी चैनपुर, नवाबगंज, भोजीपुरा, बहेड़ी, दमखोदा, शेरगढ़, फतेहगंज पश्चिमी, फरीदपुर नगर क्षेत्र, बरेली शहर के जीआईसी में स्मार्ट क्लास संचालित होंगी। सूची में 9 माध्यमिक विद्यालय भी शामिल हैं। बता दें कि इन विद्यालयों में शासन ने स्मार्ट क्लास बनाने के लिए प्रति विद्यालय दो लाख, 517 विद्यालयों में करीब 10.36 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। उपकरणों में लैपटॉप, यूपीएस, प्रोजेक्टर, इंफ्रारेड कैमरा, वूडेन व्हाइट बोर्ड, सेलिंग आउट किट, ब्लूटूथ स्पीकर, बेसिक साइट प्रिपरेशन किट शामिल हैं।
स्मार्ट क्लास से शिक्षकों ने शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होने का लिखित पत्र दिया है। शासनादेश के तहत निरीक्षण में अगर सुधार नहीं पाया गया तो संबंधित शिक्षक पर कार्रवाई की जाएगी।
- तनुजा त्रिपाठी, बीएसए