दुनका। दशकों से बाढ़ की त्रासदी झेल रहे सुलतानपुर गांव के लोग जब प्रशासन से शासन तक इससे बचाव की गुहार लगाकर थक गए तो उन्होंने खुद ही इससे निजात पाने का बीड़ा उठाया और चंदा करके नदी की धारा बदलने के लिए खुदाई शुरू करा दी। हालांकि एसडीएम ने जरूर ग्रामीणों की मदद करते हुए तीन बुलडोजर निशुल्क उपलब्ध करा दिए, जबकि डीजल और अन्य खर्च ग्रामीण खुद ही उठा रहे हैं। अब तक चंदा करके ग्रामीण करीब 1 लाख 20 हजार रुपये खर्च कर चुके हैं।
2011 में आई बाढ़ ने सुलतानपुर गांव पर जमकर कहर ढाया था। बहगुल नदी के कटान में 75 मकान ढह गए थे, जिससे यह परिवार सड़क पर आ गए थे। इस तबाही का दंश झेल चुके कई परिवार आज भी धनेटा-शीशगढ़ मार्ग पर झोंपड़ी डालकर रह रहे हैं। 2014 में तत्कालीन सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने मनरेगा के तहत मिट्टी के कट्टे डलवाकर तीन लेयर में पिचिंग कराई थी, जिनमें से दो लेयर पिछले वर्षों में हुई बरसात में बह गईं। इसके बाद इस साल 24 जून को हुई पहली बारिश में तीसरी लेयर भी बह गई। इसके साथ ही एक मकान भी ढह गया तो ग्रामीणों के जेहन में फिर से 2011 में हुई तबाही का मंजर ताजा हो गया। उन्होंने एसडीएम रोहित यादव से मिलकर गांव को बाढ़ से बचाने के लिए नदी किनारे पक्की पिचिंग कराने की मांग की, लेकिन जब कोई हल नहीं निकला तो खुद ही इस समस्या से निपटने का मन बना लिया। हालांकि इस काम में एसडीएम ने भी उनकी मदद की।
मुख्यमंत्री लगा चुके गुहार, मिला सिर्फ आश्वासन
वर्ष 2012 से ग्रामीण गांव को नदी के कटान से बचाने के लिए जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। ग्रामीणों को कहना है इस बीच कई सरकारें बदलीं। चाहे बसपा सरकार रही हो या सपा और अब प्रदेश में भाजपा की सरकार है, लेकिन किसी ने उनका दर्द नहीं समझा। तमाम वादे तो किए गए, लेकिन पूरा एक भी नहीं हुआ।
विधायक ने भी दी छोटी सी आहुति
मंगलवार को सुलतानपुर गांव में चल रहा नदी की धारा बदलने का काम देखने विधायक डॉ. डीसी वर्मा भी एसडीएम मीरगंज रोहित यादव, पीडब्ल्यूडी एसडीओ पुनीत कुमार के साथ पहुंचे। उन्होंने काम का जायजा लेने के बाद बारिश शुरू होने से पहले नदी किनारे कट्टे लगाने की सलाह दी। साथ ही बुधवार को जेई बाढ़ खंड को मौके पर रहकर ग्रामीणों के साथ रहने को कहा। इस दौरान विधायक ले 11 हजार रुपये नकद काम करा रहे गांव के ओमेंद्र सिंह को दिए। साथ ही आश्वासन दिया कि वह डीएम से आर्थिक मदद दिलाने की बात करूंगा। एसडीएम रोहित यादव से कहा कि उन्होंने 11 हजार रुपये दिए हैं तो वह कम से कम 22 हजार रुपये ग्रामीण को दें। वहीं मल्सा खेड़ा के पूर्व प्रधान मोतीराम वर्मा ने पांच हजार रुपये की आर्थिक मदद की।
- पक्की पिचिंग करने के लिए मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजा है। साथ ही डीएम से भी यहां मनरेगा के तहत पिचिंग कराने को कहा है। एसडीएम से भी कुछ रकम को इंतजाम करके देने को कहा है। - डीसी वर्मा, भाजपा विधायक मीरगंज