आंवला। करीब एक साल पहले लाखों रुपये के बिजली बिल कम करने के खेल में आरोपी एसडीओ को पुलिस ने जांच में दोषी पाया है। विवेचक ने विभाग से आरोपी एसडीओ विनोद सिंह राणा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
आंवला उपखंड क्षेत्र में सात दिसंबर, 2018 को पावर कॉरपोरेशन के एसडीओ विनोद सिंह राणा ने संविदा कर्मचारी अनिल कुमार यादव के खिलाफ व्यक्तिगत विभागीय आईडी हैक कर विभाग को लाखों रुपये का चूना लगाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अनिल पर था कि उसने एसडीओ की आईडी हैक कर फर्जी तरीके से बिजली बिल संशोधित कर लाखों के वारेन्यारे कर लिए। उन्होंने पुलिस को बताया दिसंबर, 2016 से गाजीपुर के थाना करोड़ा क्षेत्र के गांव बरसरा का अनिल यादव संविदा पर कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर तैनात था। उसने आईडी हैक करके उसका इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं से बिल कम करने के बदले लाखों रुपये वसूल लिए। बता दें कि इससे पांच दिन पहले मनोना के गजेंद्र समेत चार लोगों ने संविदा कर्मचारी के खिलाफ बिल संशोधन के नाम पर 80 हजार रुपये वसूलने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचक उदयवीर सिंह ने बताया जांच के दौरान सामने आया कि एसडीओ की बिना जानकारी के बिल संशोधित नहीं किए जा सकते, क्याेंकि बिल संशोधन संबंधी पासवर्ड एसडीओ के पास ही होता है। लिहाजा जांच में एसडीओ राणा को सीधे तौर पर दोषी पाया गया है। विभाग से उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई है। बता दें कि विभाग हेराफेरी और कंप्यूटर पर बिल संशोधित कर उपभोक्ताओं से वसूली करने के आरोप में एसडीओ राणा को सस्पेंड कर चुका है।