बदायूं। पहले ही दिन से इस मामले को हादसा बताने की पुलिस कोशिश कर रही थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने सारे राज खोल दिए कि महिला के साथ हैवानियत की हदें पार कर दी गई थीं। ऐसे में इस बात की भी आशंका है कि पुलिस इस मामले को हादसे का रूप देकर एक तीर से तीन शिकार करने की कोशिश तो नहीं कर रही है। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि इस मामले को अब भी पुलिस हादसा साबित करने पर लगी है।
रविवार को जब रात में यह घटना हुई तो पुलिस ने उसे संज्ञान में नहीं लिया। तत्कालीन इंस्पेक्टर राघवेंद्र प्रताप सिंह ने न केवल परिवार वालों की नहीं सुनी बल्कि अधिकारियों तक को गुमराह कर दिया। शायद यही वजह रही कि अधीनस्थों पर भरोसा करते हुए एसएसपी संकल्प शर्मा ने भी ये बयान जारी कर दिया कि महिला की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई है। परिजन और गांव वाले सूखे कुंए मे गिरने से मौत होना बता रहे हैं। इसके बाद जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के साथ हैवानियत उजागर हुई तो अधिकारियों की नींद खुली और रिपोर्ट दर्ज करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया बल्कि मुख्य आरोपी पुजारी पर इनाम भी घोषित कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो पुलिस अब भी हादसा साबित करने पर तुली है और आने वाले दिनों में ऐसा किया भी जा सकता है।
बताते हैं इसके पीछे पुलिस की मंशा एक तीर से तीन शिकार करने की है। पहला ये कि यदि यह मामला हादसा साबित किया जाता है तो पुलिस की पहले से चली आ रही थ्योरी सच साबित हो जाएगी, दूसरी ये कि हादसा होने पर हत्या की बात की भी गुंजाइश नहीं बचती। तीसरी बात रही सामूहिक दुष्कर्म की, तो इसके पीछे भी एक कहानी गढ़े जाने की तैयारी चल रही है, जिससे दुष्कर्म की बात को दूसरा रूप देकर इसे भी खारिज किया जा सके। ऐसे में तीनों बातें साबित होने पर पुलिस की अब तक की हुई फजीहत पर थोड़ा मरहम लग सकेगा और वे शासन के कोप का शिकार होने से बच सकेंगे।
कैसे लीक हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट..होगी मजिस्ट्रीयल जांच
- मृतका की पोस्टमार्टम रिपोर्ट लीक होकर मीडिया तक कैसे पहुंच गई। यह पुलिस के गले की हड्डी बन गई। इस बात को लेकर भी पुलिस और प्रशासन परेशान है। इसकी मजिस्ट्रीयल जांच के लिए डीएम कुमार प्रशांत ने एडीएम एफआर नरेंद्र बहादुर सिंह को नामित किया है। एडीएम द्वारा जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि इस बारे में जो भी व्यक्ति अपना साक्ष्य या बयान दर्ज कराना चाहे, वह नौ जनवरी तक करा सकता है।
दुष्कर्म और हत्या की घटना के विरुद्ध महिलाओं ने डीएम कार्यालय पर किया प्रदर्शन
बदायूं। उघैती क्षेत्र में हुई घटना के विरोध में लोकमोर्चा ने डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। लोकमोर्चा कार्यसमिति सदस्य प्रियंका यादव ने कहा कि उन्नाव से लेकर हाथरस और अब उघैती की घटनाओं से जाहिर हो गया है कि योगी सरकार बलात्कारियों को बचाने की हरसंभव कोशिश करती है। उघैती पुलिस निर्भया जैसे जघन्य बर्बर दुष्कर्म और हत्या के मामले को हादसा बताकर मामले को दबाने में लगी रही। महिला के साथ इतनी हैवानियत की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन अतिरिक्त मजिस्ट्रेट पारसनाथ मौर्य को दिया गया । ज्ञापन में घटना की न्यायिक जांच करने, दोषियों को बचाने वाले जनपद के आला पुलिस -प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित करने, आरोपी को गिरफ्तार कर फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाने, पीड़ित परिवार को एक करोड़ मुआवजा व एक सदस्य को नौकरी देने आदि मांगें की गईं हैं। इस मौके पर शीबा काजमी,आसमा, जय देवी, मिथलेश आदि महिलाएं मौजूद रहीं।