बदायूं। शहर के मोहल्ला लोची नगला स्थित राय साहब की धर्मशाला की जमीन बेचने वाले ने न केवल धर्मशाला की जमीन बेची बल्कि धर्मशाला को किराए पर उठा दिया और वहां रहने वाले गरीब लोगों से किराया भी वसूल रहा है। इस धर्मशाला में पहले कई परिवार किराये पर रहते थे, जिनसे धर्मशाला का कथित मालिक किराया वसूल रहा था। हालांकि अब यहां तीन चार परिवार ही रह रहे हैं, जिनसे अब भी किराया लिया जा रहा है। कई दुकानें भी किराये पर उठी हैं। रोजगार जाने के भय से ये लोग भी आवाज नहीं उठा पा रहे हैं। इनमें से कुछ दुकानदारों को किराये की रसीद भी दी गई हैं।
शहर के लोचीनगला मोहल्ले में राय साहब की धर्मशाला स्थित है। इसी धर्मशाला के अंदर अति प्राचीन मंदिर भी स्थित है। कुछ समय पहले इस धर्मशाला को अपनी बताते हुए टिकटगंज निवासी एक व्यक्ति ने लोगों को बेचना शुरू कर दिया था। कागजों में हेरफेर करते हुए पुरानी चुंगी से शहबाजपुर तक की बेशकीमती जमीन बेच दी गई, जिस पर लोगों ने दुकानें और बहुमंजिला भवन तक बना लिए। इन लोगों ने धर्मशाला के स्थित मंदिर का रास्ता भी बंद कर दिया। पिछले दिनों नगर पालिकाध्यक्ष दीपमाला गोयल और सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार के मुआयने के दौरान धर्मशाला की जमीन बेचे जाने का पता उन्हें चला था, जिसके बाद शुक्रवार को इन सभी लोगों को नोटिस जारी कर दिए गए, जिसमें सात दिनों के भीतर संबंधित अभिलेख, प्रमाणित मानचित्र व अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं। इधर, यह भी पता चला है कि खुद को धर्मशाला का मालिक बताने वाला व्यक्ति इसमें रहने वाले लोगों से हर माह किराया भी वसूल रहा है। पहले धर्मशाला में दो दर्जन से अधिक परिवार रहते थे, लेकिन धीरे धीरे यह लोग यहां से चले गए। अब यहां चार-पांच परिवार रह रहे हैं, इनसे प्रतिमाह सात सौ-आठ सौ रुपये किराया लिया जाता है। इसके अलावा कुछ दुकानें भी किराये पर उठी हैं, जिनमें एक हजार रुपये से ज्यादा लिए जाते हैं। कुछ दुकानदारों को किराये की रसीद तक दी गई हैं, जिसमें मालिक का नाम राजीव सरीन, निवासी टिकटगंज लिखा है। लोगों का कहना है कि जिस व्यक्ति की खुद की जमीन ही नहीं थी, उसने उसे बेच भी दिया, साथ ही किराये पर उठाकर वसूली भी की जा रही थी।
किराया बढ़ाने का दबाव बना रहा कथित मालिक
- धर्मशाला में रहने वाले परिवार मेहनत मजदूरी करके जैसे तैसे अपने परिवार का गुजारा करते हैं। इन परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। इन लोगों के अनुसार, उन पर लगातार किराया बढ़ाने का दबाव बनाया जा रहा है। कथित मालिक ने कुछ दिन पहले ही यहां आकर किराया बढ़ाने की बात की थी। इनका कहना है कि यदि वह गरीबी का दंश न झेल रहे होते तो उन्हें यहां रहने की जरूरत क्या थी। इसके अलावा कुछ दुकानदार भी यहां रहकर अपना रोजगार चला रहे हैं। इनसे भी अच्छा खासा किराया वसूला जाता है। कुछ दुकानदारों से सालों पूर्व एकमुश्त रकम भी ली गई थी।
जिन लोगों ने धर्मशाला की जमीन खरीदकर दुकानें व भवन बनाए हैं उनको नोटिस पहुंच गए हैं। यदि वे संबंधित अभिलेख, मानचित्र व अपना पक्ष तय समय के भीतर नहीं रखते हैं तो सरकारी संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके अलावा जो यहां बतौर किरायेदार की हैसियत से रह रहे हैं वह भी नोटिस का जवाब दाखिल करें ताकि पता चल सके कि वे किसे इसका किराया दे रहे हैं। किसी भी हाल में अब सरकारी संपत्ति पर कब्जा नहीं रहने दिया जाएगा।
अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट/अधिशासी अधिकारी