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संसाधन न वक्त.. कागजों में दौड़ रहा एंटी रोमियो स्क्वॉड

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बरेली। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता और प्रमुख सचिव के विशेष निर्देश के बाद भी एंटी रोमियो स्क्वॉड निष्क्रिय पड़ा है। हाल ही में एक दिन में 201 मनचलों की धरपकड़ दिखाने के बाद से दस्ते फिर खामोश हैं। कई थानों में इनके पास संसाधन नहीं हैं तो कई जगह स्क्वॉड के स्टाफ को दूसरे कामों में लगा दिया जाता है। हालांकि रिकार्ड में 11 से 25 दिसंबर तक शोहदों की धरपकड़ का अभियान चलाया जा रहा है।
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योगी सरकार बनते ही एंटी रोमियो स्क्वॉड बनाकर मनचलों पर सख्त एक्शन लेने की बात कही गई थी। शुरू में बरेली में भी सड़क पर शोहदों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की गईं। शोहदों में पुलिस का आतंक था और नौबत यहां तक आई कि कई बार पुलिस पर मनमानी से मारपीट करने का भी आरोप लगा। तब वरिष्ठ अफसरों को मॉनिटरिंग का निर्देश दिया गया। धीरे धीरे शासन की प्राथमिकता वाला यह दस्ता अपनी उपयोगिता खो रहा है। छेड़छाड़ की लगातार बढ़ रही घटनाओं के बावजूद शहर से लेकर देहात तक एंटी रोमियो स्क्वाड की गतिविधियां दिखाई नहीं दे रही हैं।
हर थाने में टीम तो है पर कर रही दूसरे काम
एंटी रोमियो स्क्वॉड के लिए हर थाने में टीम गठित की गई है। महिला या पुरुष दरोगा को दस्ते का प्रभारी बनाया गया है तो दो महिला कांस्टेबल, एक पुरुष कांस्टेबल व जरूरत के मुताबिक दूसरे स्टाफ को इसमें शामिल किया गया है। संबंधित पुलिसकर्मी थाने की किसी बीट या चौकी पर अपने मूल काम की जिम्मेदारी में महिला सुरक्षा की जिम्मेदारी भूल जा रहे हैं। स्कूल-कॉलेजों के पास टीमों की नियमित गश्त नहीं हो पा रही और कागजों में ही दस्ते को चलाया जा रहा है। जिम्मेदार अफसर भी इसकी मॉनीटरिंग नहीं कर रहे।
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टीम के पास वाहन और संसाधन नहीं
कोतवाली, प्रेमनगर जैसे कुछ थानों को छोड़ दें तो बाकी थानों के एंटी रोमियो स्क्वॉड के पास अगर से वाहन नहीं हैं। फर्स्ट एड किट जैसी चीजें तो इन थानों के वाहनों में भी नहीं हैं। ऐसे में अधिकांश मामलों में दस्ते के लोगों को थानेदार से गाड़ी मिलने तक इंतजार करना पड़ता है। कई बार पुलिसकर्मी बाइक पर ही शोहदों को बैठाकर थानों तक लाते हैं।
‘एंटी रोमियो स्क्वॉड संतोषजनक काम कर रहे हैं। फिलहाल 25 दिसंबर तक अभियान चलाकर मनचलों की धरपकड़ के निर्देश दिए गए हैं। किसी स्तर पर खामी है तो उसे दूर कराया जाएगा।’
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- अविनाश चंद्र, एडीजी जोन
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