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कॉलेजों में पढ़ने वाले लड़के क्यों बन रहे अपराधी.. पुलिस भी चक्कर में

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बरेली। हत्या और लूट जैसी वारदातों में जिस नई उम्र के लड़कों की भूमिका सामने आ रही है, उससे पुलिस अफसर भी हैरत में हैं। हालत यह है कि पिछले एक हफ्ते में हुई हत्या, लूट और अपहरण की ज्यादातर वारदातों में 15 से 25 साल की उम्र के किशोरों और युवाओं का हाथ सामने आया है।
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हाल ही में रिछा और फरीदपुर में हुई हत्या की वारदात और भुता इलाके में पेट्रोल पंप मालिक से लूट के मामले में पुलिस ने नई उम्र के लड़कों को ही पकड़ा है। मंगलवार को ही हुई एक व्यक्ति के अपहरण की घटना में चार छात्रों को गिरफ्तार किया गया है। हाल ही में गिरफ्तार किए ऑटोलिफ्टर गैंग के ज्यादातर सदस्य भी कॉलेजों में पढ़ने वाले लड़के निकले। ताबड़तोड़ ढंग से हो रही चेन स्नैचिंग की वारदात युवा ही कर रहे हैं। पुलिस के लिए बड़ा सिरदर्द यह है कि आपराधिक गतिविधियों में लिप्त ज्यादातर युवा कॉलेजों में पढ़ाई भी कर रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई करने के दौरान अक्सर पुलिस भी पशोपेश में पड़ जाती है।

अभिभावक और समाज संभाले अपनी जिम्मेदारी: एसएसपी
आपराधिक मामलों में नई उम्र के लड़कों की भूमिका सामान्य बात हो गई है। हाल फिलहाल यह आंकड़ा ज्यादा बढ़ा है। युवाओं को सही रास्ते पर लाने में परिवार और समाज की जिम्मेदारी ज्यादा है। पुलिस भी अपने स्तर से युवाओं को अपराध से दूर रखने का काम करती है। प्रयास रहता है कि सामान्य मामलों में इन्हें चेतावनी देकर या परिवार के सामने शर्मिंदा कर छोड़ दिया जाए। - शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी
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अभिभावकों की ज्यादा दोस्ती बच्चों के लिए खतरनाक: डॉ. हेमा
टीन एज में हार्मोंस तेजी से बदलते हैं। बच्चे हर अच्छा या बुरा काम करके देखना चाहते हैं। भावनाओं का ज्वार तीव्र होता है और मन की बात न करने वाला शख्स दुश्मन लगने लगता है। वे कम मेहनत में सबकुछ पाना चाहते हैं। क्राइम पर फोकस फिल्में में देखने के बाद इसे टैलेंट समझकर फेस करना चाहते हैं। सोशल मीडिया का भी बड़ा रोल है। अभिभावकों का जरूरत से ज्यादा फ्रेंडली होना भी अनुशासन का दायरा तोड़ रहा है। - डॉ. हेमा खन्ना, मनोवैज्ञानिक

48 घंटे में हत्या की पांच वारदातों से दहला जिला
कुछ दिनों पहले तक लूट की ताबड़तोड़ वारदातों से अपराधी कोहराम मचाए हुए थे। भुता में पुलिस के हाथ लगे गैंग के बाद इस अपराध में कमी आई तो हत्याओं का सिलसिला चल पड़ा। पिछले 48 घंटों में पांच हत्याओं से दहशत का माहौल है। पांच अक्तूबर को फरीदपुर में छात्र सोहेल की हत्या हुई तो छह को रिछा के छात्र नजीब को मार दिया गया। पांच अक्तूबर से ही लापता भुता के बाबूराम का शव सात की रात जंगल में पड़ा मिला। इज्जतनगर में हाईवे किनारे कंबल में लिपटा मिला शव भी हालात के लिहाज से हत्या का ही मामला है। यह अलग बात है कि महीने भर पुराने शव में मौत की वजह खोजने लायक साक्ष्य पोस्टमार्टम में ही नहीं मिल सके। सोमवार देर रात पॉश इलाके में हुए सीमेंट व्यापारी हत्याकांड से भी लोग सहम गए। इससे पहले 29 सितंबर को भी इज्जत नगर के चांवड़ में एक शव लटका हुआ मिला। कंकाल नुमा शव के हालात भी हत्या का इशारा कर रहे थे।
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