बरेली। सिद्धार्थ रोहतगी की हत्या काफी नृशंस ढंग से की गई। पुलिस की छानबीन से साफ हुआ कि हत्यारों ने सिद्धार्थ को हत्या से पहले बेरहमी से पीटा। उनके सिर के बाल तक उखाड़ डाले और फिर हत्या के बाद भी उनका शव घसीटा। मौके पर सॉफ्ट ड्रिंक की तीन खाली बोतलों के साथ एक शराब पव्वा मिलने से पुलिस हत्यारों के सिद्धार्थ के परिचित होने का अनुमान लगा रही है। हालांकि उनकी करोड़ों की संपत्ति, लूट और कारोबारी लेनदेन के विवाद जैसे बिंदुओं पर भी छानबीन की जा रही है।
परिचितों के मुताबिक सिद्धार्थ सीधे और सरल व्यक्ति थे। न वह शराब पीते थे न उनके किसी और ऐब की जानकारी परिचितों को है। मां-बाप की मृत्यु हो चुकी थी, चाचा-ताऊ के साथ भी कोई विवाद नहीं था। इकलौती बहन श्रद्धा की शादी 17 साल पहले ही पूना में हो चुकी है। बड़ी संपत्ति के वह इकलौते मालिक थे। पुलिस के मुताबिक सिद्धार्थ के सिर को लोहे की किसी वजनदार चीज से कुचला गया जिसकी वजह से सिर की कई हड्डियां टूट गईं। आंख और गाल पर धारदार हथियारों से वार किए गए थे। मौके पर काफी खून था। हत्यारों ने मेन गेट के ठीक सामने हत्या के बाद लाश को करीब 10 फुट घसीटकर नए बन रहे कमरे के आगे डाल दिया था ताकि गेट की दराज से किसी को शव न दिखे।
पुलिस को घटनास्थल के पास एक ड्रम में सिद्धार्थ के सिर के बाल मिले। मौके पर निंबूज कंपनी की तीन सॉफ्ट ड्रिंक मिलने से अनुमान लगाया गया कि हत्यारे सिद्धार्थ के परिचित रहे होंगे। पीछे की साइड में शराब का एक क्वार्टर और गिलास भी मिला। शराब किसने पी, यह भी पुलिस अंदाजा लगाने की कोशिश कर रही है। कर्मचारी रंजीत ने बताया कि वह रोज की तरह शाम सात बजे सिद्धार्थ को बताकर घर चला गया था।
बारादरी इलाके में फेंका मोबाइल और बैग
हत्यारे घटना के बाद सिद्धार्थ का मोबाइल और बैग लेकर भागे थे जिसमें चेकबुक भी थी। काफी तलाश के बाद भी पुलिस को मौके पर मोबाइल नहीं मिला। सिद्धार्थ के ससुर अजीत सक्सेना ने बताया कि दोपहर बाद उनके नंबर पर सिद्धार्थ के ही नंबर से कॉल आई तो वह चौंक गए। बताया गया कि थाना बारादरी से बोल रहे हैं। कोई एक बैग पुलिस को दे गया है जिसमें ये मोबाइल और चेकबुक आदि है। अजीत ने बताया कि बुधवार को वह बारादरी थाने जाएंगे।
हत्या में इस्तेमाल हथियार नहीं मिला हत्यारे कहां से आए.. ये भी पता नहीं
हत्यारे सिद्धार्थ की हत्या में इस्तेमाल हथियार अपने साथ ले गए। वे किधर से घुसे और किधर से निकले, यह पता लगाने में भी पुलिस ने अच्छीखासी माथापच्ची की। खोजी डॉग दीवार के नीचे उसी जगह टिककर बैठ गया जहां से कूदकर कर्मचारी ने मेनगेट खोला था। इस लिहाज से पुलिस मान रही है कि हत्यारे इसी तरह दीवार से कूदकर अंदर आए होंगे और हत्या के बाद इधर से ही या पीछे के खंडहर से आसपास के भवनों और प्लॉटों में जा रहे रास्तों से निकले होंगे। परिचित होने पर उनके मेनगेट से आने की भी संभावना है पर जाते वक्त मेनगेट अंदर से बंद मिलने पर ये दावा कमजोर हो जाता है।
पूर्व आईएमए अध्यक्ष के साले, भाजपा नेता के भतीजे थे सिद्धार्थ
सिद्धार्थ केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के करीबी भाजपा नेता सतीश रोहतगी के भतीजे थे। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल के ममेरे साले थे। डॉ. रवीश के साथ कुछ डॉक्टर भी परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। डॉक्टर ने बताया कि उनकी पत्नी सिद्धार्थ को राखी बांधती थीं। वह बहुत सीधे थे इसलिए उनका घरेलू नाम भोलू रखा गया था।
पत्नी ने दी मुखाग्नि
पोस्टमार्टम के बाद शव का सिटी श्मशान भूमि पर अंतिम संस्कार किया गया। पत्नी अनुपमा ने सिद्धार्थ की चिता को मुखाग्नि दी तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।