बरेली। पुलिस उन महकमों में से एक है जहां भ्रष्टाचार के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। यह अलग बात है कि ज्यादातर मामलों में कोई कार्रवाई नहीं हो पाती। बरेली में पुलिस के भ्रष्टाचार के कई मामले लंबे समय से जांच में ही अटके पड़े हैं। इनकी फाइलों की स्थिति क्या है, यह अफसरों को भी पता नहीं है। रिश्वत बंटवारे का आरोपी एक दरोगा हाल ही में प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बन चुका है।
हाल के दिनों में पुलिस में भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा मामला अक्तूबर 2020 में एक वीडियो वायरल होने के बाद हुआ था। इसमें क्राइम ब्रांच की टीम रिश्वत के रुपयों का आपस में बंटवारा करती नजर आ रही थी। एसएसपी रोहित सिंह सजवाण ने इसके बाद क्राइम ब्रांच के दरोगा अब्बास हैदर, गिरीश चंद्र जोशी, सिपाही रवि प्रताप, पुष्पेंद्र कुमार, विकास कुमार, वीरेंद्र कुमार, रविशंकर, चालक जितेंद्र राणा, पुष्पेंद्र और हेड कांस्टेबल तैय्यब अली को निलंबित कर कोतवाली में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
इस मामले की विभागीय जांच एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने की जिसमें सभी पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। कोतवाली में दर्ज मुकदमे की जांच सीओ सिटी श्वेता यादव कर रही हैं। उन्होंने रिश्वत का वीडियो जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा है लेकिन साल भर बाद भी यही कहा जा रहा है कि लैब से रिपोर्ट नहीं आ सकी है। इस बीच सभी दोषी पुलिसकर्मी दूसरे जिलों में ट्रांसफर होकर पोस्टिंग पा चुके हैं। आरोपी दरोगा गिरीश चंद्र जोशी तो हाल ही में प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बन चुका है।
सर्विलांस के सिपाहियों की ब्लैकमेलिंग भी दबा दी
मार्च में बसंतविहार में रहने वाले राजकुमार ने एसपी सिटी कार्यालय की सर्विलांस सेल में तैनात सतीश समेत दो सिपाहियों के खिलाफ थाना इज्जतनगर में भ्रष्टाचार की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इन सिपाहियों ने राजकुमार को मोबाइल चोरी में जेल भेजने की धमकी देकर 10 हजार रुपये वसूल लिए थे। आईजी रमित शर्मा के आदेश पर जांच के बाद इस मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई थी। रिपोर्ट के बाद दोनों सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन अब तक उनके खिलाफ चार्जशीट नहीं लग सकी है।
सबूत गायब करने वाला विवेचक भी बेखौफ
आनंद विहार कॉलोनी निवासी दूरदर्शन के इंजीनियर मोहन सिंह नयाल ने दो जून 2021 को अपने बेटे शिखर और बहू निधि के खिलाफ थाना प्रेमनगर में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि बेटे-बहू उनका उत्पीड़न करते हैं और इससे बीमार होकर उनकी पत्नी कमलेश की 30 अप्रैल 2021 को मौत हो गई। मगर इस मामले में विवेचक शनिदेव ने मोहन सिंह नयाल द्वारा सौंपे गए सबूत गायब कर दिए और मुकदमे से गिरफ्तारी की धाराएं भी हटा दीं। जांच में इसकी पुष्टि हो चुकी है लेकिन शनिदेव के खिलाफ अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
बच्चे से वसूली करने वाले सिपाही और पीआरडी जवान पर नहीं लगी चार्जशीट
जनवरी 2021 में फतेहगंज पूर्वी का सिपाही जगदीश सिंह बिलपुर रेलवे क्रासिंग के पास दातागंज रोड पर पीआरडी जवान बूटा सिंह के साथ चेकिंग कर रहा था। चेकिंग के नाम पर उसने राहगीरों से वसूली की। आटा लेने चक्की जा रहे लड़के को पकड़ लिया और फिर रुपये लेकर छोड़ा। Iस पर लोगों ने उसका रिश्वत लेते हुए वीडियो बना लिया। ये वीडियो वायरल होने पर दोनों को सस्पेंड कर रिपोर्ट लिखाई गई लेकिन अब तक चार्जशीट नहीं लग सकी है।
इन सभी मामलों में विवेचना चल रही है। विवेचकों से प्रगति रिपोर्ट लेकर शीघ्र कार्रवाई पूरी कराई जाएगी। - रोहित सिंह सजवाण, एसएसपी