भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान में शल्य चिकित्सा विभाग की ओर से बेसिक्स ऑफ रेडियोलॉजी एंड अल्ट्रा सोनोग्राफी पर छह दिनी लघु प्रशिक्षण कार्यक्रम हुआ। संस्थान के निदेशक डॉ. आरके सिंह ने कहा कि शल्य चिकित्सा करते समय पशु चिकित्सक में साहस और धैर्य होना चाहिए। शल्य चिकित्सा दर्द रहित होनी चाहिए। पशुपालन विभाग के डॉ. राजेश वार्ष्णेय ने कहा कि जैसे-जैसे मनुष्य की उम्र बढ़ती है, उसकी प्रतिभा भी बढ़ती है। हमें खुद को विकसित करना होगा। निदेशक, अलीगढ़ डॉ. आरके यादव ने कहा कि रोजमर्रा की परेशानी को दूर करने के लिए आईवीआरआई में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए। कामधेनु योजना के कारण पशु चिकित्सा अधिकारियों की पहचान बढ़ी है।
इस मौके पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के निदेशक डॉ. अमर पाल ने प्रगति आख्या प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एम हक ने किया और डॉ. पी किंजवडेकर ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर संयुक्त निदेशक (कैडराड) डॉ. वीके गुप्ता, डॉ. एके शर्मा, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. एएम पावड़े, डॉ. एसके मैती, डॉ. किरणजीत सिंह, डॉ. अभिषेक चंद्र सक्सेना ने आभार व्यक्त किया।