बरेली। बच्चों के बेहतर भविष्य की चाहत में परिवार नियोजन के प्रति लोगों का रुझान बढ़ा है। इसमें गर्भ निरोधक साधन सहायक साबित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार कोरोना महामारी के बाद गर्भ निरोधक साधनों का प्रयोग 30 फीसदी तक बढ़ा है। इसके सापेक्ष जन्मदर में 1.2 फीसदी की गिरावट हुई। औसतन दंपती अब दो बच्चे ही पैदा कर रहे हैं।
हम दो हमारे दो का नारा वर्षों से लोग सुन रहे थे। बावजूद इसके बरेली के दंपती के औसतन तीन से चार बच्चे पैदा कर रहे थे। बरेली कॉलेज में समाज शास्त्र की विभागाध्यक्ष प्रो नवनीत कौर आहूजा के मुताबिक कोरोना महामारी के दौरान लोगों को परिवार नियोजन की अहमियत पता चली। बेहतर गुजर-बसर के लिए बच्चों की संख्या सीमित रखने के प्रति जागरूक हुए, जिसका असर अब जन्मदर घटने के तौर पर सामने आया है। आगे इसमें और कमी आने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे- 4 के मुताबिक तब स्वास्थ्य विभाग के लक्ष्य के सापेक्ष करीब 40 फीसदी दंपती गर्भ निरोधक साधनों का प्रयोग कर रहे थे। वर्ष 2021 में जारी एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट में आंकड़ा बढ़कर 60 फीसदी जा पहुंचा। वहीं, बीते माह जारी स्वास्थ्य समिति की रिपोर्ट के अनुसार लक्ष्य के सापेक्ष जिले के करीब 80 फीसदी दंपती अब परिवार नियोजन के साधन अपना रहे हैं। इसमें पुरुषों की सहभागिता महिलाओं के सापेक्ष बेहद कम है।
गर्भ निरोधक गोलियाें और नसबंदी से ज्यादा अब अंतरा इंजेक्शन पर महिलाओं का भरोसा बढ़ा है। रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल से अब तक लक्ष्य के सापेक्ष 17.44 फीसदी महिलाओं ने नसबंदी, 27.54 फीसदी ने काॅपर टी, 38.43 फीसदी ने पीपीआईयूसीडी, 57.07 फीसदी महिलाओं ने अंतरा इंजेक्शन अपनाया। अंतरा इंजेक्शन स्वास्थ्य केंद्र पर निशुल्क लगाया जाता है। एक बार इंजेक्शन लगवाने पर तीन माह तक गर्भ नहीं ठहरता। इस इंजेक्शन से महिलाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता मुहिम का सकारात्मक असर दिख रहा है। लिहाजा जन्मदर कम हुई है। लक्ष्य के सापेक्ष करीब 80 फीसदी दंपती किसी न किसी साधन को अपना रहे हैं। - डॉ विश्राम सिंह, सीएमओ