बरेली। बढ़ती ठंड के साथ बच्चे व बुजुर्ग वायरल बुखार और सर्दी, खांसी की चपेट में आ रहे हैं। इधर, कफ सिरप को लेकर चल रही कार्रवाई से दवा कारोबारी सहमे हुए हैं। कारोबार भी 40 फीसदी प्रभावित हुआ है। हालांकि, डॉक्टर प्रतिबंधित साल्ट के बजाय अन्य सिरप लिख रहे हैं। मेडिकल स्टोर से पर्चे पर ही सिरप मिल रहा है।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में मिलावटी कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत के मामले का संज्ञान लेकर संबंधित कफ सिरप प्रदेश में भी प्रतिबंधित किया गया है। इन्हें बेचने वालों की धरपकड़ के लिए ड्रग विभाग कार्रवाई कर रहा है।
कोडीन युक्त सिरप की बिक्री का मामला पकड़ में आने के बाद इस वर्ष कारोबारियों ने भी बच्चों के सिरप का स्टॉक पिछले साल के सापेक्ष कम मंगाया। बताते हैं कि सिरप की बिक्री नवंबर से फरवरी तक सर्वाधिक होती है। इसी बीच कार्रवाई होने से कई मेडिकल स्टोर संचालकों ने नया स्टॉक ही नहीं मंगाया।
जिनके पास सिरप बचे थे, उन्होंने विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया। चिह्नित मिलावटी नकली, प्रतिबंधित साल्ट से इतर सिरप की बिक्री पर अंकुश न होने की पुष्टि पर ही नया स्टॉक मंगाया, वह भी 40 फीसदी कम। वहीं, पिछली घटनाओं के चलते लोग भी सिरप कम ही ले रहे हैं।
बच्चों को हितकर दवा देने में कोई अड़चन नहीं
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक बच्चे सर्दी, जुकाम, खांसी, जकड़न, माइल्ड निमोनिया की चपेट में मिल रहे हैं। रोग से निजात के लिए जो बच्चे टेबलेट नहीं निगल सकते उन्हें सिरप लिखी जा रही है। प्रतिबंधित या बच्चों की सेहत के लिए नुकसानदेह सिरप नहीं दिए जा रहे हैं। ड्रग इंस्पेक्टर राजेश के मुताबिक प्रतिबंधित ब्रांड या साल्ट के अलावा किसी अन्य सिरप का नमूना नहीं लिया जा रहा है।