सीबीगंज। बंडिया में कुत्तों बच्चों की जान ले रहे हैं। नगर निगम उनको पकड़ने के नाम पर खानापूरी कर रहा है। शनिवार को टीम कुत्ते पकड़ने बंडिया पहुंची। वहां पालतू कुत्तों को पकड़ा तो ग्रामीणों ने विरोध करके छुड़ा लिया। टीम ने जंगल से आने वाले कुत्तों को पकड़ने से इन्कार कर दिया। टीम में शामिल लोगोें का कहना था कि टीम में कम से कम दस लोग होने चाहिए, तभी काम चलेगा।
बंडिया गांव में दो साल में कुत्ते चार बच्चों की जान ले चुके हैं, जबकि कई बच्चों को नोचकर घायल कर चुके हैं। नगर निगम की टीम इन कुत्तों को पकड़ने में अभी तक कामयाब नहीं हो सकी है। शनिवार को नगर निगम की टीम फिर कुत्तों को पकड़ने गांव पहुंची। चार पालतू कुत्तों को पकड़ा तो गांव वालों ने इसका विरोध किया। इसके बाद टीम ने कुत्तों को छोड़ दिया। इसके बाद टीम कुछ आगे बढ़ी और फिर गांव के ही तीन और कुत्तों को पकड़कर ले गई।
जिन कुत्तों ने ली चार बच्चों की जान, उन्हें पकड़ने पहुंचे सिर्फ दो लोग
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली कुत्ते बच्चों पर हमला कर रहे हैं। हमला कर वे जंगल में छिप जाते हैं। नगर निगम की टीम जंगल में घुसने का साहस नहीं जुटा सकी। टीम का कहना था कि फिलहाल हम दो लोग उन कुत्तों को नहीं पकड़ सकते हैं। उनको पकड़ने के लिए टीम में कम से कम दस लोग होने चाहिए। पशुपालन अधिकारी आदित्य तिवारी भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों से बातचीत की।
कुत्तों के मुंह लगा खून
ग्रामीणों के मुताबिक इन कुत्तों के मुंह खून लग गया है। बंडिया व इसके करीब स्थित गांव तिलियापुर में जानवरों की कटान होती है। बंडिया में मांस का कारोबार कम है, लेकिन तिलियापुर में यह काम बड़े पैमाने पर होता है। यहां पशुओं के अवशेष पड़े रहते हैं। इन्हें खाकर कुत्तों को मांस की आदत हो गई है। पास में ही जंगलनुमा झाड़ियों में इनका डेरा है। मांस नहीं मिलने पर ये मासूमों को नोच लेते हैं।
लगातार चला रहे अभियान
लगातार अभियान चलाया जा रहा है। शनिवार को मैं खुद टीम के साथ मौजूद रहा और सात कुत्ते पकड़े गए हैं। जैसे ही टीम कुछ कुत्तों को पकड़ना शुरू करती है तो बाकी भाग जाते हैं। बहुत बड़ा खेतिहर क्षेत्र हैं। खेत-खेत होकर कुत्ते दो किलोमीटर तक निकल जाते हैं। इसलिए यह दिक्कत आ रही है। मगर टीम रोजाना अभियान चलाकर उन्हें पकड़ रही है। - आदित्य तिवारी, पशुपालन अधिकारी, नगर निगम