इलाज के साथ अस्पताल में भर्ती मरीजों को पहुंचा रहे भोजन
डॉ. रामेश्वर सिंह, जोनल मेडिकल अधिकारी, कठुआ
बनी में जोनल मेडिकल अधिकारी और पीएचसी कोटी चंडियार में तैनात डॉ. रामेश्वर सिंह ने समाज सेवा में एक बार फिर मिसाल कायम की है। सब डिवीजन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के बीच दूरदराज के इलाकों से लोग अस्पताल में पहुंच रहे हैं। ऐसे में इन लोगों के पास खानपान की व्यवस्था नहीं रहती। क्षेत्र में सीमित संसाधनों और दुकानों के बंद होने के चलते डॉ. रामेश्वर सिंह ने मदद का हाथ बढ़ाया है।
उन्होंने कोरोना महामारी में घोषित लॉकडाउन के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों और तीमारदारों के लिए निशुल्क भोजन की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी संभाल ली है। घोषणा की है कि जबतक लॉकडाउन रहेगा, तब तक अस्पताल में पहुंच रहे मरीजों और तीमारदारों तक मदद पहुंचाई जाएगी। इससे पहले भी डॉ. रामेश्वर सिंह की ओर से समय-समय पर सब डिवीजन के विभिन्न दूरदराज इलाकों में निशुल्क स्वास्थ्य जांच कैंप लगाए जाते थे। यही नहीं, दूरदराज के इलाकों में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जांच से लेकर टीकाकरण की जिम्मेदारी भी संभाले हुए हैं। मूलरूप से बनी के ढग्गर निवासी डॉ. रामेश्वर के अनुसार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा करने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता।
दो बार हुए संक्रमित फिर भी लौट आए ड्यूटी पर
डॉ. मेराज, राजकीय मेडिकल कॉलेज, शाहजहांपुर
शाहजहांपुर के राजकीय मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत डॉ. मेराज दो बार संक्रमित हो चुके हैं। इसके बावजूद मरीजों का दर्द अपना समझकर इलाज में कोई कसर नहीं छोड़ते। संक्रमित होने के नौ दिन बाद ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली।
वह कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच काम करने की वजह से घर में भी खुद को अपने बुजुर्ग माता-पिता से अलग रखते थे। कोरोना संक्रमण के फैलाव के साथ पिछले साल से घर में अलग ही रह रहे हैं। इमरजेंसी में काम करने के कारण डॉ. मेराज दुर्घटनाग्रस्त या नाजुक हालत में आने वाले मरीजों के तुरंत इलाज में जुट जाते हैं। ऐसे मरीजों का कोरोना टेस्ट करने का समय नहीं होता। इसलिए वह उपचार में देरी नहीं करते। इसी वजह से संक्रमण की चपेट में आने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है।
डॉ. मेराज गत वर्ष भी कोरोना संक्रमित हुए थे। रिपोर्ट निगेटिव आते ही ड्यूटी ज्वाइन कर ली थी। इस वर्ष इलाज के दौरान पॉजिटिव हुए तो निगेटिव होते ही नौ दिन में ड्यूटी ज्वाइन कर ली। पोस्ट कोविड आराम की जरूरत नहीं समझी। डॉ. मेराज के मुताबिक कोरोना काल में सभी स्वास्थ्यकर्मी योद्धा की तरह काम कर रहे हैं। घर में बैठने का समय नहीं है। देश-समाज को उनकी जरूरत है और फर्ज निभाने से वह पीछे नहीं हटना चाहते हैं।
पंद्रह दिनों में सौ रोगियों को घर जाकर दे चुके निशुल्क दवाइयां और खाना
सौरभ तिवारी, अमरीक विहार कॉलोनी, झांसी
कोरोना काल में महानगर निवासी एक दवा व्यवसायी सौरभ खुद कोरोना से ठीक होने के बाद जरूरतमंदों को खुद पैसा खर्च कर अस्पतालों में भर्ती भी करा रहे रहे हैं। यही नहीं, पिछले पंद्रह दिनों में वह सौ रोगियों को घर जाकर निशुल्क दवाएं और राशन तक दे चुके हैं।
अमरीक विहार कॉलोनी सौरभ तिवारी दवा व्यवसायी हैं। लगभग एक महीने पहले वो उनकी पत्नी, दो बेटियां, मां, भाभी समेत परिवार के नौ लोग कोरोना की चपेट में आ गए। सौरभ, उनकी पत्नी और मां आईसीयू में भर्ती हुए और बाद में ठीक हो गए। इसके बाद उन्होंने कोरोना संक्रमितों की मदद की ठान ली। अब वह आर्थिक रूप से कमजोर कोरोना संक्रमितों को घर जाकर निशुल्क दवाइयां दे रहे हैं। पिछले 15 दिनों में वह लगभग 100 लोगों को दवाएं बांट चुके हैं।
यही नहीं, हालात में सुधार न होने पर मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराते हैं। कुछ मरीजों को तो उन्होंने खुद पैसा खर्च कर निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। कई ऐसे परिवार जिनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हैं, उन्हें राशन सामग्री तक पहुंचाई है।