कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से जेनेरिक दवाइयों में आया है उछाल
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बरेली। चीन में फैले जानलेवा कोरोना वायरस की चपेट में भारत का जेनेरिक दवा व्यापार आ चुका है। दवाइयां के दाम 40 से 60 फीसदी तक बढ़ गए हैं। थोक व्यापारियों का कहना है कि अगर अगले पंद्रह दिनों तक यही हालात रहे तो अब ब्रांडेड दवाइयों के दाम भी बढ़ा जाएंगे। अभी तक ब्रांडेड दवाओं के दाम में कोई बढ़ोत्तरी नहीं हुई है।
दवा व्यापारियों के मुताबिक, कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई तो जेनेरिक दवाइयों के दाम में उछाल आ गया, लेकिन अभी तक ब्रांडेड दवाइयाें के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। दवा व्यापारी दुर्गेश खटवानी का कहना है कि बड़ी कंपनियां दवाओं में इतना अधिक मुनाफा लेकर चलती हैं कि अभी आपूर्ति प्रभावित होने से उनके दामाें में कोई बढ़ोत्तरी तो नहीं हुई है, लेकिन मुनाफा कम हो गया है। कच्चे माल का आयात अगर पूरी तरह से ठप होने की स्थिति में आता है तो इन दवा कंपनियों को स्विट्जरलैंड, यूके व अन्य देशों से कच्चा माल लेना पड़ेगा। ऐसे में लागत बढ़ेगी और सरकार से इन्हें दवाओं के दाम बढ़ाने की अनुमित लेनी होगी। इसके बाद कंपनियां नए बैच और नए एमआरपी के साथ बाजार में दवाएं उतारेंगी।
एक आंकड़ा यह भी - भारतीय फार्मा उद्योग भारी मात्रा में थोक दवाओं (एक्टिव फ ार्मास्युटिकल इंटीग्रेंट एंड इंटरमिडिएट्स (एपीआई) के आयात के लिए चीन पर निर्भर है। देश में 70 फ ीसदी एपीआई चीन से आयात होता है। चीन से आयात पिछले कई वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। भारत ने बीते साल 249 अरब रुपये के थोक दवाओं का आयात किया था। यह घरेलू खपत का कुल 40 फीसदी है। बीते साल भारत ने चीन से 174 अरब रुपये के एपीआई का आयात किया है।