सील पॉश इलाकों में भी लगा जाम, रामपुर गार्डन के अस्पतालों में जुट रही भीड़
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क्लस्टर में आवाजाही बंद करना पुलिस को चुनौती, टोकने पर बिगड़ रहे लोग
कुतुबखाना में मरीज को ले जा रही एंबुलेंस भी काफी देर तक जाम में फंसी रही
बरेली। कोरोना संक्रमण फैलने के बाद करीब आधा शहर सील किया जा चुका है जहां पुलिस को व्यवस्थाएं बनाना मुश्किल हो रहा है। बाकी शहर में जलभराव और जाम लोगों की राह में सबसे बड़ी मुसीबत बना हुआ है। हालत यह है कि राजेंद्रनगर और रामपुर बाग जैसे पॉश इलाकों में भी जाम लग रहा है। दुश्वारियां बढ़ने के बाद संभ्रांत माने जाने वाले लोग भी पुलिस के लिए मुसीबत बन रहे हैं। पुलिस के साथ नोंकझोंक और उलझने की घटनाएं बढ़ गई हैं। रामपुर बाग का मुख्य गेट बंद कराने के बाद भी सोमवार को ट्रैफिक नहीं रुका तो हालात काबू में करने के लिए कोतवाल को खुद उतरना पड़ा। राजेंद्रनगर में मॉडर्न रोड पर भी जाम लग गया। अस्पतालों में उमड़ रहे मरीज और तीमारदार लॉकडाउन को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहे हैं।
रामपुर बाग में लगा जाम तो घंटों पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत
रामपुर बाग में लोगों की आवाजाही बढ़ने पर प्रभा टाकीज वाला मुख्य मार्ग बंद करके आयकर दफ्तर साइड का रास्ता खोला गया। अब इस रास्ते के अलावा फायर स्टेशन साइड के रास्ते से भी आवाजाही हो रही है। दोपहर में कॉलोनी वालों और तीमारदारों की गाड़ियों से जाम लगा तो वहां तैनात पुलिस कर्मी बेबस नजर आने लगे। तब कोतवाल गीतेश कपिल खुद रामपुर बाग पहुंचे और ट्रैफिक संभाला। कोतवाल ने तीमारदारों और मरीजों के जरूरत के आधार पर वाहन निकलवाए। लोगों को समझाया कि उनकी सुरक्षा के लिए ही इलाका सील किया गया है, बिना जरूरत घरों से न निकलें।
अस्पतालों में बेतहाशा भीड़ फिर भी मास्क तक का ख्याल नहीं
रामपुर बाग के निजी अस्पतालों में सोमवार को बेतहाशा भीड़ थी। अस्पतालों के रिसेप्शन एरिया मरीजों और तीमारदारों से खचाखच भरे थे। कई लोग तो बिना मास्क एक-दूसरे से सटकर बैठे थे। दूसरे सील इलाके राजेंद्रनगर के निजी अस्पतालों में भी अंदर से बाहर तक भीड़ लगी थी। अस्पतालों का प्रबंधतंत्र इस बारे में न तो मरीजों को चेतावनी दे रहा था और न ही अपनी ओर से सुरक्षा का कोई उपाय कर रहा था। डॉक्टर जरूर पेशेंट को देखने से पहले और बाद में सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे थे।
राजेंद्रनगर के मॉडर्न रोड की साइड लेन पर लगा जाम
सील इलाके राजेंद्रनगर में पुलिस को सबसे ज्यादा जद्दोजहद मॉडर्न रोड पर करनी पड़ रही है। इस रोड को सील कर पुलिस ने एक साइड लेन इसलिए खोल दी थी ताकि किसी बीमार या जरूरतमंद को इस रास्ते से भेजा जा सके। राजेंद्रनगर के लोगों ने अब इसी को मेन रोड मान लिया है। नतीजतन अब यह साइड लेन पूरी तरह जाम रहती है। सोमवार दोपहर जाम लगने पर पुलिस ने जब टोकाटाकी शुरू की तो रसूखदार उलझने लगे। हालांकि गनीमत यह है कि यहां से डीडीपुरम तक बाजार पूरी तरह बंद हैं।
सुभाषनगर पुलिया से पानी में होकर गुजर रहे लोग, जाम भी लगा
सुभाषनगर में पूरा इलाका सील कर दिया गया है। यहां स्थानीय लोगों की आवाजाही को केवल पुलिया के नीचे से होकर जाने वाला रास्ता ही बचा है। चार दिन पहले हुई बारिश के बाद से अब तक पुलिया के नीचे पानी भरा है। सोमवार को पुलिया के नीचे भरा पानी न निकलने से वाहन चालकों की भी हालत खराब हो रही थी। ऊपर से एक ही रास्ते पर दबाव होने के चलते यहां जाम लगा था। चौपुला से सुभाषनगर थाने आने वाली रोड पहले से सीवर लाइन के काम के चलते दलदल बनी है।
श्यामगंज से बरेली कॉलेज रोड पर दलदल से मुसीबत
श्यामगंज चौराहे से कालीबाड़ी की ओर इन दिनों सीवर लाइन का काम चल रहा है। पूरा रोड खोदकर डाल दिया गया है। ऐसे में लोगों के पास केवल इन मोहल्लों की गलियों में होकर जाने का विकल्प बचा है। बाइक और ई रिक्शा इन संकरी गलियों में होकर गुजर रहे हैं तो जाम लग रहा है। कई अंदरूनी गलियां भी निर्माणाधीन हैं जिनकी वजह से कई बार लोगों को बैरंग लौटना पड़ता है।
चौपुला चौराहे पर जाम, कुतुबखाना पर फंसी एंबुलेंस
संकरे चौपुला चौराहे पर भी इन दिनों जाम लगा रहता है। सोमवार को दो दिन बाद लॉकडाउन हटा तो बेहिसाब वाहन शहर की सड़कों पर उमड़ पड़े। चौपुला चौराहे पर जाम की स्थिति रही। वहीं कुतुबखाना पर तो दिन भर वाहन फंसते रहे। एंबुलेंस भी जाम की जद में आ गई, जिसमें मरीज को ले जाया जा रहा था। हालांकि यहां ट्रैफिक स्टाफ और होमगार्ड तैनात थे पर बाजार में त्योहार की वजह से उमड़ी भीड़ से व्यवस्था बनानी मुश्किल हो रही थी।
दो दिन बाद बाजार खुला तो दुकानदार भूले दो गज की दूरी
दो दिन का साप्ताहिक लॉकडाउन खत्म होने के बाद सोमवार को शहर के बाजारों में दोबारा से भीड़ बढ़ गई। कोरोना का खतरा भूलकर लोग खरीददारी करने बाजार में निकल आए। बड़ा बाजार, किला व श्यामगंज बाजार में खासी भीड़ थी। दुकानदार दो गज की दूरी का नियम भूलकर बिक्री में जुटे थे तो पब्लिक भी बेफिक्र थी।