बरेली। कोरोना ने बाकी कारोबार की तरह मीट कारोबार को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में मीट कारोबार ठप होने से कारोबारियों को करीब 70 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अनुमति मिलने के बाद इस कारोबार ने फिर से खड़ा होने की कोशिश की मगर अभी मीट बाजार में सुस्ती है। कारोबारियों की मानें तो मीट कारोबार अब आधे से भी कम रह गया है। ऐसे हालात में इस कारोबार से जुड़े लोगों को काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
मीट कारोबारियों के मुताबिक, मीट की बिक्री शुरू होने के बाद भी कारोबार में वो उछाल नहीं आ पा रहा है जो लॉकडाउन से पहले था। सामान्य दिनों के मुकाबले कारोबार लगभग आधा रह गया है़। वहीं बिरयानी और कबाब का कारोबार तो बीस फीसदी भी नहीं रह गया है। आमतौर पर सामान्य दिनों में लगभग एक से डेढ़ करोड़ का रुपए का प्रतिदिन मीट का कारोबार है। इसमें लगभग हर 45 से 50 लाख लाख रुपए बड़े का मीट, मटन का लगभग 12 लाख रुपये, चिकन का 36 लाख और मछली का लगभग 5 लाख रुपये प्रतिदिन का कारोबार है, जो इस समय घटकर आधे पर आ गया गया है। आम दिनों में कबाब का कारोबार लगभग 10 लाख रुपये प्रतिदिन का था और बिरयानी का कारोबार लगभग 5 लाख रुपए का हुआ करता था।
यह है वजह
मीट से जुड़े कारोबार में फिलहाल गिरावट की वजह हैं। एक तो मीट का महंगा होना, दूसरे लोगों के पास पैसे की कमी और तीसरी एक और बड़ी वजह सामने आई है कि लोग कोरोना की वजह से मीट खाने से परहेज कर रहे हैं। इसके अलावा बड़े का मीट जो रिटेल दुकानदारों के पास पैक होकर पहुंच रहा है, जिसे दुकानदार ही लेने से भी बच रहा हैं।
मीट के होटलों का भी हाल खराब
मीट के होटलों की हालत खराब है। मीट के जितने भी होटल खुल रहे हैं, वहां ग्राहक नहीं हैं। मुश्किल से पांच फीसदी ग्राहक भी होटलों में खाना खाने नहीं पहुंच रहे हैं। पूरे पूरे दिन होटल वाले हाथ पर हाथ रखे बैठे रह जाते हैं और इक्का-दुक्का ग्राहक ही बीच बीच में आते हैं। छोटे होटल वाले है वह ज्यादा मुश्किल में हैं। बड़े होटल वाले किसी तरह अपने काम को होम डिलीवरी के बल पर खींच रहे हैं मगर उनकी स्थिति भी खराब है।
मीट की बिक्री फिलहाल बेहतर नहीं है। सामान्य दिनों के मुकाबले मौजूदा हालात में जो कारोबार की शुरुआत हुई है वह लगभग आधा है। ग्राहक भी कम आ रहे हैं। इससे यही समझ में आ रहा है कि मीट महंगा होने और कोरोना के डर से ये कारोबार अपनी गति नहीं पकड़ पा रहा है। -मोहम्मद मुस्तकीम, (मीट कारोबारी), मलूकपुर
कबाब की बिक्री अभी पूरे शहर में शुरू नहीं हुई है लेकिन इन दिनों जो कारोबार की स्थिति सामने आई है, उसमें मुश्किल से 20 प्रतिशत ग्राहक ही हैं। दुकानों पर बैठकर कबाब रोटी खाने के शौकीन भी दो-चार ही आ रहे हैं। उनके पास होम डिलीवरी के भी आर्डर नहीं है। - हाजी ताजिम कुरेशी (कबाब व्यापारी), सैलानी
बिरयानी की दुकानें बेशक खुलने लगी हैं लेकिन अभी कारोबार में तेजी नहीं है। दुकान पर ग्राहक भी दिन भर में आठ दस ही आते हैं। दो चार लोग पैक करा कर भी ले जाते हैं। अभी 20 प्रतिशत भी कारोबार नहीं कह सकते। -हाफिज जमीर (बिरयानी कारोबारी) सैलानी
मीट से जुड़े कारोबार बहुत सुस्त हैं। होटल में भी अभी ग्राहकों की आमद कम है। दिन भर के अंदर दस से बारह ग्राहक ही आते हैं। हां कुछ होम डिलीवरी की वजह से थोड़ा बहुत काम चल रहा है, मगर स्थिति अभी ऐसी नहीं है कि वह कारीगरों के खर्च भी निकाल पाएं। -मोहम्मद शादाब (होटल मालिक) सिविल लाइंस
मीट के बढ़े दाम
बड़ा - 200 से 240 रुपये किलो
मटन - 560 से 600 रुपये किलो
चिकन - 200 से 280 रुपये किलो
मछली - पुराना रेट 100 रुपये किलो