पुलिस ने तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी। सात जुलाई 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन की ओर से न्यायालय में कुल नौ गवाहों के बयान कराए गए और 13 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह विशेष पाल सिंह के बयानों के आधार पर पीलीभीत जिले के गजरौला थाना क्षेत्र के गांव सिरसा सरदहा निवासी रोहित कुमार को हत्या का दोषी पाते हुए सजा सुनाई।
इकलौता पुत्र था कांस्टेबल धर्मेंद्र
न्यायालय ने कहा कि सिपाही धर्मेंद्र कुमार की उम्र 27 वर्ष थी। वह अपने पिता की इकलौती संतान थी। पिता के पुत्र खोने के दर्द को न्यायालय कितना भी महसूस करे, लेकिन इस दर्द को न्यायालय शायद शब्दों में बयां करने में असमर्थ है।
पुलिस में अराजपत्रित कर्मचारियों को विषम परिस्थितियों का करना पड़ता है सामना
न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस विभाग में 92 प्रतिशत अराजपत्रित कर्मचारी हैं। इनमें कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल, उपनिरीक्षक और निरीक्षक आदि शामिल हैं। सड़क पर ड्यूटी का कार्य कांस्टेबल, हेड-कांस्टेबल ही करते हुए पाए जाते हैं। लेकिन इन पुलिस वालों को उतनी सुविधाएं नहीं मिलती हैं, जितनी मिलना चाहिए।
पुलिस वाले शायद ही कोई तीज त्योहार अपने घर पर मना पाते हैं। पुलिस विभाग में अराजपत्रित कर्मचारियों को किन परिस्थितियों में रहकर ड्यूटी करनी होती है और क्या-क्या समस्याएं आती हैं। यह एक कविता के माध्यम से ही समझा जा सकता है। इस दौरान न्यायालय ने कविता से पुलिस विभाग के कर्मचारियों की भावनाओं का उल्लेख किया।