बरेली। बादल यूं तो चार दिनों से मंडरा रहे थे लेकिन रविवार को आखिर तेज हवाओं के साथ बरसे तो कुछ ही घंटों में तापमान छह डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। काली घटाओं ने आसमान को इस कदर ढका कि दिन में ही रात का एहसास होने लगा। मौसम विभाग का कहना है कि लॉकडाउन में घटते प्रदूषण की वजह से मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है और अगले दो दिन बारिश के दौरान तापमान निचले स्तर स्थिर रह सकता है।
आंचलिक मौसम विज्ञान अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. जेपी गुप्ता के मुताबिक करीब हफ्ते भर से बरेली क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ हावी था लेकिन पिछले दिनों हुई बारिश के बाद उच्च वायुदाब क्षेत्र बन जाने की वजह से बारिश नहीं हो पा रही थी। शनिवार रात उत्तर पूर्व दिशा से चली हवाओं ने बारिश के अनुकूल माहौल बना दिया। सुबह होते ही बादल छाने लगे लेकिन तेज हवा चलनी शुरू हुई तो छंट गए। सुबह 11 बजे हवाओं ने फिर दिशा बदली और पश्चिमी उत्तर दिशा चलना शुरू किया तो बादल फिर घिर आए। दोपहर एक बजे तक काले बादलों की वजह से अंधेरा छाने लगा। तेज हवाओं के साथ करीब दो घंटे से ज्यादा वक्त तक बारिश हुई। डॉ. गुप्ता ने बताया कि दिन भर बादल छाए रहने के साथ 22.2 एमएम बारिश से तापमान में छह डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गिरावट रिकॉर्ड की गई है।
समुद्र में बढ़ी हलचल.. 20 किमी की रफ्तार से चली हवा
डॉ. गुप्ता ने बताया कि दो महीने पहले अरब सागर से उठे तूफान की वजह से घने बादल छाए थे और करीब घंटे भर तेज बारिश हुई थी। लगभग ऐसी ही स्थिति इस बार दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि समुद्र में हो रही हलचल से पर्वतों से अचानक बादल उठने शुरू हुए। पर्वतों से सटे और तटवर्ती राज्यों में भी तेज हवाएं चलीं, काले-घने बादलों के सूरज को छिपा लेने से दिन में अंधेरा हो गया। पर्वतों से सटे मैदानी इलाकों में 20 किमी घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चली।
40 सालों में सबसे कम तापमान, पिछले साल के मुकाबले आठ से 10 डिग्री कम
बरेली। लॉकडाउन से प्रदूषण घटा, आसमान पर 25 सालों से जमी धूप और हानिकारक गैसें भी काफी हद तक कम हो गईं लिहाजा पर्यावरण पर इसका सीधा असर दिखने लगा। मौसम विज्ञानी भी इस बात पर हैरत में हैं कि पिछले साल अप्रैल में तापमान 40 डिग्री के पार निकल गया था जो इस बार अब तक 30-32 डिग्री तक अटका हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि लॉकडाउन को अगर बढ़ाया गया या उसे खत्म करने के बाद भी प्रदूषण को इसी तरह काबू में रखा गया तो इस परिवर्तन का असर लंबे समय तक दिखाई दे सकता है।
बरेली कॉलेज के बॉटनी विभाग के एमिरेट्स प्रोफेसर डॉ. डीके सक्सेना के मुताबिक करीब 40 साल बाद मौसम में बड़ा बदलाव दिख रहा है। साफ वजह यही है कि लॉकडाउन में सर्वाधिक प्रदूषण फैलाने वाली फैक्टरियां, निर्माण और ट्रैफिक पूरी तरह बंद हैं। इससे एक ओर कार्बन और दूसरी घातक गैसों का उत्सर्जन घटा है तो वायुमंडल और नदियों में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऑक्सीजन बढ़ने से ही वायुमंडल में नमी का स्तर बढ़ा है। इसी का परिणाम है कि चटख धूप में भी गर्मी का एहसास नहीं है बल्कि रात को हवाएं हल्की ठंड महसूस करा रही हैं।
डॉ. सक्सेना के मुताबिक इन्हीं तमाम कारणों से पिछले सालों के मुताबिक इस बार तापमान में बढ़ोत्तरी नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने बताया कि मौसम विभाग के रिकॉर्ड में साल 1981 तक का ही डाटा है। इस हिसाब से अप्रैल में जहां औसतन 37 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया जाता था, वहीं इस बार यह औसत 30 डिग्री सेल्सियस के इर्द गिर्द दर्ज हो रहा है।
अरब सागर की नमी से हवाओं में ठंड
उत्तर-मध्य भारत में सात गुना बारिश
मौसम विभाग कर रहा है प्रकृति में आ रहे बदलावों का अध्ययन
आंचलिक मौसम अनुसंधान केंद्र के डायरेक्टर डॉ. जेपी गुप्ता भी यह मानते हैं कि इस साल मौसम में काफी सालों बाद बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है। अप्रैल में पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बनने से इस बार उत्तर से मध्य भारत के सभी राज्यों में सामान्य से सात गुना ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ तापमान भी 37 डिग्री के पार नहीं निकल रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले दिनों भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने लॉकडाउन के बाद मौसम में आए बदलावों को दिखाने के उद्देश्य से आसमान में जमी धुंध और धूल जैसे प्रदूषण के छंटने की तस्वीरें जारी की थी। इससे साफ पता चला था कि लॉकडाउन से न सिर्फ प्रदूषण कम हुआ बल्कि प्रदूषण कम होने से प्रकृति में भी बड़े बदलाव आने लगे हैं।
नया अचंभा: पश्चिमी विक्षोभ का
क्षेत्रफल बढ़ा.. अब खंडवर्षा नहीं
इस बार सबसे ज्यादा चार बार आ चुके हैं चार मजबूत पश्चिमी विक्षोभ
मौसम वेबसाइट स्काईमेट के मुताबिक इस बार अप्रैल में अब तक चार मजबूत पश्चिमी विक्षोभ आ चुके हैं, यह भी एक तरह का अचंभा ही है। आमतौर पर अप्रैल में इतने ज्यादा पश्चिमी विक्षोभ नहीं आते और बारिश भी कम होती है। इस बार पर्वतों से सटे मैदानी इलाकों समेत तटीय प्रदेशों के निकटवर्ती राज्यों में भी कई विक्षोभ आए हैं। विक्षोभ का क्षेत्रफल सीमित होने से पहले खंडवर्षा होती थी मगर इस बार काफी बड़े क्षेत्रफल में इसका असर देखा जा रहा है। इस वजह से तापमान भी पिछले सालों से नीचे जा रहा है।
देखिए फर्क..
2019 में सात दिनों का तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
19 अप्रैल 29.2 16.5
20 अप्रैल 33.3 23.3
21 अप्रैल 35.3 18.3
22 अप्रैल 37.3 19.4
23 अप्रैल 37.8 21.3
24 अप्रैल 37.5 22.7
25 अप्रैल 38.4 24.7
26 अप्रैल 40.3 25.0
2020 में सात दिनों का तापमान
तिथि अधिकतम न्यूनतम
19 अप्रैल 36.5 21.6
20 अप्रैल 35.5 22.7
21 अप्रैल 34.4 24.4
22 अप्रैल 32.5 20.4
23 अप्रैल 34.4 23.0
24 अप्रैल 31.1 22.6
25 अप्रैल 36.4 23.6
26 अप्रैल 30.1 22.9
मौसम विभाग से प्राप्त तापमान डिग्री सेल्सियस में
लॉकडाउन में एक और चोट.. भीगकर बर्बाद हुई खेतों में खड़ी पकी फसल
बरेली। तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेतों में खड़ी और कटी पड़ी गेहूं की फसल भीग गई। तेज हवाओं ने खेतों में मड़ाई के बाद रखा भूसा भी उड़ा दिया। कृषि के जानकारों के मुताबिक बारिश से गेहूं और सरसों की फसल को अच्छा-खासा नुकसान पहुंचाया है। हालांकि जिन किसानों की फसलें कट चुकी थीं, अगली फसल की बुवाई के लिए उनका काम बारिश ने आसान कर दिया।
मौसम का मिजाज वैसे तो किसानों ने सुबह ही भांप लिया था लेकिन यह भी उम्मीद लगाए रहे कि शायद पिछले दिनों की तरह शायद बूंदाबांदी ही हो। खेतों में पड़ी फसल को तेजी से माड़कर सुरक्षित करने के लिए भी भरसक जतन किया मगर दोपहर बाद काले बादलों के घिरते ही उनको उम्मीदों पर भी अंधकार हावी होने लगा। मनौतियां मांगनी शुरू कीं लेकिन आखिरकार बारिश ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर ही दिया। खेतों में पानी भर गया। गेहूं और सरसों के साथ भूसा भी भीगकर बेकार हो गया।
हमारे गांव के ज्यादातर किसानों की फसल कट गई थी लेकिन पास के गांवों में उन तमाम किसानों का नुकसान हो गया जिनकी फसल कटनी बाकी थी। हालांकि बारिश से सब्जी और गन्ने की फसलों को फायदा भी मिलेगा। - सोनू, ग्राम प्रधान भरतौल
अब न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना भी मुश्किल
बारिश में भीगी गेहूं की फसल का किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा, यह भी मुश्किल खड़ी हो गई है। जानकारों के मुताबिक खेतों में काटी गई फसल बरबाद हो गई। मड़ाई करने के बाद निकले गेहूं को किसान सुरक्षित नहीं कर पाए तो और ज्यादा नुकसान होगा। भीगने के बाद क्रय केंद्र गेहूं खरीदने से इनकार कर देंगे। लॉकडाउन में किसानों के आगे आय का कोई और जरिया भी नहीं है।
वर्जन: बारिश और तेज हवाओं से किसानों की फसलें अगर बरबाद हुई हैं तो वह बीमित फसल का मुआवजा के लिए हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर जानकारी दे दें। जो किसान बीमित नहीं है वह प्रशासन के पास अपना आवेदन दर्ज कराएं। नियमानुसार उन्हें मुआवजा दिया जाएगा। - धीरेंद्र चौधरी, जिला कृषि अधिकारी