ये है हकीकत
शहर की ज्यादातर दुकानों पर मिठाइयां डिब्बे सहित तौली जा रही हैं। देहात क्षेत्रों में लकड़ी के तराजू और ईंट-पत्थर के बाट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। शहर में भी ठेलों पर फेरी लगाकर सामान बेचने वालों के काटा-बाट दुरुस्त नहीं होते। किराना, सब्जियों से लेकर फलों तक की खरीद में उपभोक्ता घटतौली का शिकार हो रहे हैं। सराफा बाजार में कांटा जरा सा हिल जाए तो हजारों रुपये के वारे-न्यारे हो जाते हैं। मिलावट और गुणवत्ता में कमी से जुड़े मामले उपभोक्ता अदालतों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन घटतौली के मामलों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
कार्रवाई का प्रावधान
विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत कम तौलने, असत्यापित तराजू और बाट का इस्तेमाल करने या डिब्बे के साथ सामान तौलने जैसी अनियमितताओं पर दुकानदारों पर हजारों रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, बार-बार घटतौली करते हुए पकड़े जाने पर संबंधित दुकान का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। कुछ गंभीर मामलों में सजा का भी प्रावधान है।
व्यापारी भी कार्रवाई पर उठाते हैं सवाल
बाट-माप विभाग की कार्रवाई के दौरान टीम के साथ अवैध वसूली करने वाले लोगों की मौजूदगी का आरोप लगाते हुए व्यापारी भी सवाल उठा चुके हैं। व्यापारी नेता अनिल अग्रवाल का कहना है कि बाट-माप समेत कई विभाग ऐसे हैं, जो त्योहारों के सीजन पर सक्रिय होते हैं और दुकानदारों का शोषण करते हैं।
कुछ लोग निरीक्षण के लिए दुकानों पर पहुंचते हैं, लेकिन उनके पास विभागीय पहचान पत्र या कार्रवाई से संबंधित दस्तावेज नहीं होते। ऐसे में आशंका इस बात की रहती है कि कहीं कुछ लोग विभागीय अधिकारी या कर्मचारी बनकर व्यापारियों पर दबाव तो नहीं बना रहे हैं।
बाट-माप विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक मुकुल रंजन उपाध्याय ने बताया कि अवैध वसूली के आरोप गलत हैं। विभागीय टीम निरीक्षण के दौरान मशीनों की शुद्धता और उनके सत्यापन की स्थिति पर विशेष ध्यान देती है। घटतौली रोकने के लिए जांच अभियान आगे भी जारी रहेंगे।