भूमि अधिग्रहण में देरी से बरेली रिंग रोड का निर्माण शुरू होने में देरी हो सकती है। तय किए गए प्रतिकर में साल्वेज वैल्यू की कटौती से अधिग्रहण अटक गया है। किसानों को मुआवजा मिलने में देरी हो रही है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के बीच पत्राचार चल रहा है। कटौती के मुद्दे के समाधान में जितनी देरी होगी, मुआवजे के लिए भू स्वामियों को उतना ही इंतजार करना पड़ेगा। वहीं, 80 प्रतिशत भू अधिग्रहण नहीं हुआ तो रिंग रोड का निर्माण शुरू होने में भी देरी हो सकती है।
विकास को रफ्तार देने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने 15 जनवरी को 2,117 करोड़ रुपये लागत की परियोजना को मंजूरी दी थी। टेंडर भी निकल गए। एनएचएआई के अधिकारी मार्च तक टेंडर फाइनल करवाकर अक्तूबर से काम शुरू कराने की कवायद कर रहे थे। अब साल्वेज वैल्यू में तीस फीसदी की कटौती के कारण अधिग्रहण की प्रक्रिया फंस गई। एनएचएआई के क्षेत्रीय कार्यालय ने साल्वेज वैल्यू में 30 प्रतिशत कटौती के लिए एसएलएओ को पत्र भेजा है।
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एसएलएओ इससे सहमत नहीं है। उन्होंने साल्वेज वैल्यू की कटौती के प्रस्ताव को एनएच एक्ट 1956 और वर्ष 2013 के भूमि अर्जन अधिनियम-3 के विपरीत बताया है। अगर कटौती की जाती है तो प्रतिकर वितरण में देरी हो सकती है। ऐसे में सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित अभिनिर्णय के अनुसार ही वित्तीय स्वीकृति दी जाए। इस मामले में अब एनएचएआई को फैसला लेना है। इसलिए काम अटकता दिख रहा है। अगर कुल जमीन के 80 फीसदी पर कब्जा नहीं मिलता है तो एनएचएआई काम शुरू नहीं करा सकेगा।