बरेली। सुन्नी मुसलमानों के बरेलवी मरकज ने वक्फ संशोधन विधेयक की मुखालफत का एलान किया है। उलमा, वकीलों और कोर कमेटी के पदाधिकारियों के साथ बैठक के बाद काजी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती मोहम्मद असजद रजा खां कादरी ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने अपनी संपत्तियां अल्लाह की राह में वक्फ की थीं। हमें उनकी सुरक्षा और सही इस्तेमाल का सांविधानिक अधिकार है। यह संशोधन नहीं, साजिश है। जब कानून सबके लिए बराबरी का न हो तो वह पक्षपाती बन जाता है।
बैठक के बाद उलमा ने बताया कि इसका मकसद वक्फ संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन और इसके कानूनी पहलुओं पर विचार-विमर्श करना रहा। उलमा और वकीलों ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 की निंदा करते हुए कहा कि जो शरीयत के खिलाफ हो, उसको हम नहीं मानते हैं l
देशभर के उलमा से करेंगे रायशुमारी, चलाएंगे जागरूकता अभियान
जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सलमान हसन खान (सलमान मियां) ने कहा कि संविधान में किसी भी व्यक्ति या समुदाय के मौलिक अधिकारों के हनन की अनुमति नहीं है। इस मुद्दे को जनता के सामने लाने के लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाएंगे। कानूनी कार्रवाई पर भी विचार होगा। काजी-ए-हिंदुस्तान के आदेश पर देशभर के उलमा की बैठक बुलाकर रायशुमारी की जाएगीl
इन कानूनी पहलुओं पर हुआ मंथन
बैठक में वकीलों ने वक्फ संशोधन विधेयक को मुसलमानों की धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मस्थलों के प्रबंधन के अधिकार के विरुद्ध बताया। इसे विभाजनकारी भी बताया गया। यह भी कहा कि संपत्ति के स्वामित्व के विवाद को केवल सिविल कोर्ट ही तय करेगा, राज्य सरकार के अधिकारी इसे तय नहीं कर सकते। अन्य कानूनी पहलुओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में अब्दुर्रहीम नश्तर फारुकी, मुफ्ती सैयद अजीमुद्दीन अजहरी, मुफ्ती शाहिद रजा, मुफ्ती फैसल रजा, मुफ्ती बिलाल अनवर सहित अन्य उलमा ने अपनी राय रखी। संवाद