उत्तर प्रदेश में 2017 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी कांग्रेस को जिले की कई विधानसभा सीटों से प्रत्याशी उतारने के लिए मजबूत चेहरे तलाशने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। स्थिति यह है कि पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन को छोड़ दें तो अभी तक कोई चेहरा ऐसा नहीं है, जो किसी भी सीट पर कांग्रेस में चुनावी लिहाज से मजबूत नजर आता हो। वैसे सुप्रिया ऐरन ने भी अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि वह कैंट से लड़ेंगी या फिर किसी और सीट से। हालांकि जानकारों का कहना है कि फिलहाल उनके कैंट से आने की संभावना ज्यादा है। ऐसे में कैंट को छोड़ दें तो शहर तथा जिले की बाकी सात विधानसभा सीटों पर भी कोई दमदार चेहरा कांग्रेस के पास नहीं है।
स्थानीय संगठन की ओर से सारी सीटों पर सभी दावेदारों के नाम पार्टी हाईकमान को भेजे जा चुके हैं। फिलहाल तो पार्टी उनकी दमदारी टटोल रही है लेकिन सूत्रों का कहना है कि अभी तक एक-दो को छोड़कर किसी को भी चुनाव मैदान में उतारने लायक ही नहीं समझा गया है। पार्टी हाईकमान ने अपने कार्यकर्ताओं को ही चुनाव लड़ाने में तरजीह देने की बात कही, लेकिन एक बड़े नेता ने बताया कि समीकरणों की कसौटी पर बहुत सारे अपने खरे नहीं उतर पा रहे हैं। यही वजह है कि यहां से भेजे गए पैनल के नाम बताने से जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय भी परहेज करते हैं। उनका कहना है कि जो नाम स्थानीय संगठन की ओर से सुझाव गए हैं, उनमें सारे पार्टी के पुराने चेहरे हैं, कोई भी बाहरी नेता नहीं है। वैसे सूत्रों का कहना है कि शहर से पिछला चुनाव लड़ चुके मुजाहिद हसन खां, प्रदेश सचिव प्रेमप्रकाश अग्रवाल के अलावा हाल ही में सपा से पार्टी में आए अमजद सलीम और महानगर अध्यक्ष चौधरी असलम भी दावेदार हैं। भोजीपुरा विधानसभा से फिलहाल प्रदेश महासचिव अजय शुक्ला का नाम लिया जा रहे हैं लेकिन बाकी सीटों पर कई लोगों के दावों के इतर ऐसे प्रमुख चेहरे नहीं हैं, जिनको पार्टी गंभीरता से ले रही हो। जिलाध्यक्ष पांडेय कहते हैं कि प्रत्याशी तय करना पार्टी हाईकमान का काम है, जिसे उतारा जाएगा, उसको चुनाव लड़ाएंगे।
पीके की टीम ने समीकरण टटोले
बारेली। जिले की सभी नौ विधानसभा सीटों पर चुनावी समीकरण टटोलने के इरादे से कांग्रेस के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके की तीन सदस्यीय टीम दो दिन से यहां डटी हुई थी। गुरुवार को टीम के सदस्यों ने शहर के एक होटल में पार्टी के मंडल प्रभारी यूसुफ कुरैशी की मौजूदगी में जिलाध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष, प्रांतीय पदाधिकारियों, जिला और शहर उपाध्यक्ष तथा महासचिव के अलावा ब्लाक अध्यक्षों व फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों की अलग-अलग बैठकें करके जिले के सियासी हालात को जानने की कोशिश की। पीके टीम के सदस्यों ने स्थानीय कार्यकर्ताओं से दूसरे दलों के चेहरों और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। प्रत्येक विधानसभा के जातीय समीकरण भी जानें। हालांकि उन्होंने किसी भी विधानसभा से पार्टी टिकट के दावेदारों के नाम पर कोई चर्चा नहीं की लेकिन पार्टी सूत्रों ने बताया कि जिले की सभी विधानसभाओं में पीके की टीमों ने गांव और कस्बों में जाकर कई चेहरों के नाम पर सर्वे किया। टीम के सदस्यों ने मीडिया से भी बात करने से परहेज किया।