बरेली। ग्राम पंचायतों में मनरेगा के कार्यों का सोशल ऑडिट करने वाले ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) की नियुक्ति प्रक्रिया में धांधली की शिकायत आई है। चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी होते ही आरोप सामने आए। इसे लेकर बीआरपी पद पर सेवाएं दे रहे युवाओं ने डीएम को शिकायती पत्र सौंपा और जांच की मांग की। इनका कहना था कि चयन के लिए फिर से साक्षात्कार लिए जाएं।
मनरेगा के अंतर्गत कराए गए कार्यों का सोशल ऑडिट करने के लिए बीआरपी रखे जाते हैं। नियुक्ति दो साल के लिए होती है। हर दो साल में नए सिरे से नियुक्ति की जाती है। आरोप है कि कुछ चहेतों को चयनित कर पहले से सेवाएं दे रहे युवाओं को किनारे कर दिया गया। बीआरपी यह शिकायत लेकर सोमवार को दोपहर विकास भवन पहुंचे, लेकिन मुख्य विकास अधिकारी उस समय नहीं थे। इस पर सभी बीआरपी कलक्ट्रेट पहुंचे। जिलाधिकारी से मिले। जिलाधिकारी ने जांच एवं कार्रवाई का आश्वासन दिया। बीआरपी का कहना था कि 15 पुराने बीआरपी में से सिर्फ दो का चयन ही हो सका है। गड़बड़ी की तह तक जाने के लिए विकास भवन के एक अधिकारी के स्टेनो की भूमिका भी जांच होनी चाहिए। शिकायती पत्र पर भूपराम श्रीवास्तव, सत्यपाल, राम अवतार, नवल किशोर ब्रह्म प्रकाश आदि के नाम हैं। ब्यूरो