बरेली। भू अधिग्रहण घोटाले में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) आशीष कुमार के निलंबन के बाद अब बरेली-सितारगंज हाईवे और रिंग रोड के लिए भूृमि अधिग्रहण, अवार्ड और मुआवजा वितरण के काम कुछ दिन अटकेंगे। आशीष कुमार के स्थान पर अभी तक किसी की नियुक्ति नहीं हुई है। अगर एक-दो दिन में नियुक्ति हो भी जाती है तो नए अधिकारी को पूरा मामला समझने और निर्णय लेने में 15 दिन से एक माह तक का समय लग सकता है। इसका असर रिंग रोड और बरेली-सितारंगज हाईवे परियोजना पर पड़ेगा।
बरेली में धंतिया से इन्वर्टिस यूनिवर्सिटी तक 29.95 किलोमीटर लंबे रिंग रोड का निर्माण होना है। इस पर भी घोटाले की आंच है। अधिग्रहण और कब्जा मिलने की प्रक्रिया में देरी तो पहले से हो रही है। अब थोड़ी और देरी होगी। 32 गांवों के भू-स्वामियों की जमीन का अधिग्रहण कर 863 करोड़ रुपये मुआवजे का वितरण होना है। एनएचएआई ने 377 करोड़ रुपये की मंजूरी एसएलएओ कार्यालय को दी है, लेकिन अब तक सिर्फ 15 करोड़ ही वितरित हो सके हैं। छह गांवों के अवार्ड भी तैयार नहीं हुए हैं। इन गांवों के भू स्वामी एक साल से मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
वहीं, बरेली-सितारगंज हाईवे के लिए जिले में भू अधिग्रहण और मुआवजा वितरण लगभग पूरा हो चका है। सिर्फ एक फीसदी मामले विवादित या कोर्ट में होने की वजह से लंबित हैं। इसलिए इस परियोजना पर एसएलएओ के निलंबित होने का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। ब्यूरो
रिंग रोड और बरेली-सितारंगज हाईवे के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। कुछ गाटा संख्या का अधिग्रहण बाकी है। जल्द सभी मामले निपटाकर बरेली-सितारगंज हाईवे का काम तेजी से पूरा कराएंगे। रिंग रोड के लिए अड़चनों को दूर कराया जा रहा है। उम्मीद है कुछ दिनों में अधिग्रहण का काम रफ्तार पकड़ेगा। - प्रशांत दुबे, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी का प्रभार डिप्टी कलक्टर राम जनम यादव को सौंपा है, ताकि चल रही प्रक्रिया प्रभावित न हो। एडीएम न्यायिक का जिम्मा एडीएम प्रशासन के पास है। - रविंद्र कुमार, जिलाधिकारी