दो साल में ही बनाई समान कारोबारी नेटवर्क वाली कंपनियां
कॉरपोरेट रिकॉर्ड में संजीव कुमार कपूर का नाम अवध मेटल क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के रूप में भी दर्ज है। यह कंपनी दिसंबर 2025 में बनी और इसकी अधिकृत व चुकता पूंजी भी एक-एक लाख रुपये दर्ज है। कपूर और आरुषि सैनी का नाम मई 2026 में बनी एक डिस्टिलरी एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़ा मिला है। इस कंपनी की भी अधिकृत और चुकता पूंजी एक-एक लाख रुपये दर्ज है।
केसर चीनी मिल के सीईओ शरत मिश्रा के मुताबिक, सिर्फ कम चुकता पूंजी होने से किसी कंपनी के बड़े कारोबारी सौदे करने पर कानूनी रोक नहीं होती। कंपनी बैंक ऋण, निवेश, अन्य वित्तीय व्यवस्था या किसी अन्य स्रोत से धन जुटा सकती है। खरीदार समूह अलग-अलग कारोबार के लिए अलग-अलग माध्यमों से काम करता है।
इससे खरीद क्षमता का आकलन नहीं होता। सौदा शेयरधारकों की मंजूरी, अंतिम बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट और अन्य शतों पर निर्भर है। सौदा पूरा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2027 है। चेक बाउंस नोटिस के जवाब से स्थिति स्पष्ट होगी।
चेक बाउंस से टूटीं किसानों की उम्मीदें
किसान नसीम अहमद और बिजेंद्र सिंह ने कहा कि मिल की कुर्क भूमि की नीलामी से भुगतान की आस थी। इस बीच मिल का सौदा होने से नीलामी प्रक्रिया भी स्थगित हो गई। अब चेक बाउंस हो गए हैं। कंपनी की प्रोफाइल और भुगतान राशि में बहुत बड़ा अंतर है। इससे भुगतान की आस लगाए सैकड़ों किसानों में निराशा और आक्रोश है।
केसर मिल के सीईओ शरत मित्रा के अनुसार, खरीदार ने 11 करोड़ के चेक मिल के सौदे के लिए दिए थे। 5-5 करोड़ के 11 चेक किसानों को भुगतान करने के लिए मिले थे। बाउंस होने के बाद प्रशासन ने कुर्क भूमि की नीलामी कराने पर सहमति जताई है। नीलामी से मिलने वाली राशि से किसानों का बकाया भुगतान समेत अन्य विकल्प भी तलाशने के लिए मंथन हो रहा है।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि मिल प्रबंधन और खरीदार के बीच सीधे सौदा हुआ। इसमें प्रशासन का कोई जुड़ाव नहीं है। पिछले दिनों कुर्क भूमि की नीलामी टालने का निर्णय क्रेता, विक्रेता द्वारा प्रस्तुत अनुरोध पत्र और दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था। 24 अक्तूबर को कुर्क भूमि की नीलामी कराई जाएगी।