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बरेली: एक लाख की पूंजी वाली कंपनी ने किया था 431 करोड़ रुपये का सौदा, केसर चीनी मिल डील में बड़ा खुलासा

Fri, 09 Oct 2026 02:52 PM IST
Mukesh Kumar अजीत प्रताप सिंह, अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली जिले में केसर चीनी मिल के सौदे में चेक बाउंस होने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है। जिस कंपनी ने चीनी मिल को 431 करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा किया है, उसकी जमा पूंजी एक लाख रुपये ही है। 
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केसर चीनी मिल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एक लाख रुपये पूंजी वाली फर्म अवध फूड्स एंड मल्टी वेयरहाउस प्राइवेट लिमिटेड ने बरेली के बहेड़ी की केसर चीनी मिल को 431 करोड़ रुपये में खरीदने का सौदा कर लिया। दिए गए चेक बाउंस होने के बाद कंपनी की कॉरपोरेट प्रोफाइल चर्चा में है। इसमें एक-एक लाख रुपये ऑथराइज और पेडअप कैपिटल दिख रही है। अब मिल प्रबंधन और जिला प्रशासन आगे की कार्रवाई पर मंथन कर रहे हैं।

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किसानों से मिले कॉरपोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, अवध फूड्स एंड मल्टी वेयरहाउस प्राइवेट लिमिटेड का गठन 6 मार्च 2026 को हुआ था। कंपनी की ऑथराइज कैपिटल यानी अधिकृत शेयर पूंजी एक लाख रुपये और पेडअप कैपिटल यानी चुकता शेयर पूंजी भी एक लाख रुपये दर्ज है। कंपनी सहारनपुर में पंजीकृत है। इसके निदेशक संजीव कुमार कपूर और आरुषि सैनी हैं।

कंपनी के गठन के छह महीने बाद ही केसर मिल के चीनी, डिस्टिलरी और को-जनरेशन कारोबार के लिए 431 करोड़ रुपये का सौदा प्रस्तावित किया। हाल ही में गठित कंपनी और कम पूंजी देखकर भी सौदा करना और फिर चेक बाउंस हो जाने से भुगतान अटकने से किसान संगठनों में चर्चाओं का सिलसिला शुरू हो गया। 

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कॉरपोरेट रिकॉर्ड में संजीव कुमार कपूर का नाम अवध मेटल क्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक के रूप में भी दर्ज है। यह कंपनी दिसंबर 2025 में बनी और इसकी अधिकृत व चुकता पूंजी भी एक-एक लाख रुपये दर्ज है। कपूर और आरुषि सैनी का नाम मई 2026 में बनी एक डिस्टिलरी एंड बेवरेजेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़ा मिला है। इस कंपनी की भी अधिकृत और चुकता पूंजी एक-एक लाख रुपये दर्ज है।

केसर चीनी मिल के सीईओ शरत मिश्रा के मुताबिक, सिर्फ कम चुकता पूंजी होने से किसी कंपनी के बड़े कारोबारी सौदे करने पर कानूनी रोक नहीं होती। कंपनी बैंक ऋण, निवेश, अन्य वित्तीय व्यवस्था या किसी अन्य स्रोत से धन जुटा सकती है। खरीदार समूह अलग-अलग कारोबार के लिए अलग-अलग माध्यमों से काम करता है। 

इससे खरीद क्षमता का आकलन नहीं होता। सौदा शेयरधारकों की मंजूरी, अंतिम बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट और अन्य शतों पर निर्भर है। सौदा पूरा करने की अंतिम तिथि 15 जून 2027 है। चेक बाउंस नोटिस के जवाब से स्थिति स्पष्ट होगी। 

किसानों के हित में प्रशासन से यहां हुई चूक
  • खरीदार संजय कपूर ने मिल प्रबंधन व जिलाधिकारी को चेक देने के दौरान दोनों से ही चेक तत्काल बैंक में नहीं लगाने के लिए कहा था। इस पर संदेह क्यों नहीं किया गया?
  • चेक लेने से पहले बैंक से खरीदार की साख या खाते में पर्याप्त राशि की पुष्टि नहीं की गई?
  • आरसी जारी हुए काफी समय बीत चुका है। अब तक न तो कुर्क जमीन की ही नीलामी की गई, न ही चीनी मिल की। ऐसे में मिल मालिकों को ऐसी सौदेबाजी और शर्तों के जाल में प्रशासन को उलझाने में कामयाबी मिली?
  • जब कानूनन आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर कर्की और नीलामी के सख्त कदम उठाए जा चुके थे, तो बीच में ही मिल मालिकों के साथ ऐसे सौदेबाजी या शतों के जाल में प्रशासन क्यों उलझा, जिससे शातिर प्रबंधन को समय खीचने का मौका मिल गया?
  • केसर चीनी मिल पर किसानों का 164 करोड़ रुपये का बकाया दो साल से लंबित है। मिल का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड प्रशासन के सामने था, बावजूद मिल प्रबंधन के खोखले आश्वासनों और बिना गारंटी वाले भुगतानों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेना क्या प्रशासनिक तंत्र की अक्षमता को नहीं दर्शाता?
  • चेक बाउंस होने के इस प्रकरण में अब तक किसी भी जिम्मेदार की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई?

चेक बाउंस से टूटीं किसानों की उम्मीदें
किसान नसीम अहमद और बिजेंद्र सिंह ने कहा कि मिल की कुर्क भूमि की नीलामी से भुगतान की आस थी। इस बीच मिल का सौदा होने से नीलामी प्रक्रिया भी स्थगित हो गई। अब चेक बाउंस हो गए हैं। कंपनी की प्रोफाइल और भुगतान राशि में बहुत बड़ा अंतर है। इससे भुगतान की आस लगाए सैकड़ों किसानों में निराशा और आक्रोश है। 

केसर मिल के सीईओ शरत मित्रा के अनुसार, खरीदार ने 11 करोड़ के चेक मिल के सौदे के लिए दिए थे। 5-5 करोड़ के 11 चेक किसानों को भुगतान करने के लिए मिले थे। बाउंस होने के बाद प्रशासन ने कुर्क भूमि की नीलामी कराने पर सहमति जताई है। नीलामी से मिलने वाली राशि से किसानों का बकाया भुगतान समेत अन्य विकल्प भी तलाशने के लिए मंथन हो रहा है।
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जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि मिल प्रबंधन और खरीदार के बीच सीधे सौदा हुआ। इसमें प्रशासन का कोई जुड़ाव नहीं है। पिछले दिनों कुर्क भूमि की नीलामी टालने का निर्णय क्रेता, विक्रेता द्वारा प्रस्तुत अनुरोध पत्र और दस्तावेजों के आधार पर लिया गया था। 24 अक्तूबर को कुर्क भूमि की नीलामी कराई जाएगी। 
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