मॉर्निंग वाकर्स के लिए टहलने की एकमात्र जगह गांधी उद्यान में कुछ समय बाद हरियाली कम कंक्रीट की इमारतें ज्यादा दिखाई देंगी। तथाकथित विकास के नाम पर गांधी उद्यान को जिस तरह व्यावसायिक और व्यक्तिगत हितों को पूरा करने का जरिया बनाया जा रहा है, उसको लेकर पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं। फिर भी नगर निगम यह खूबसूरत जगह बर्बाद कर मॉर्निंग वाकर्स की भावनाओं से खेलने में लगा है। अंग्रेजों के जमाने के इस उद्यान का तथाकथित विकास धीरे-धीरे उसकी लगभग आधी हरियाली को निगल चुका है। हालांकि इतने पर भी नगर निगम का दिल नहीं भरा है, अब भी पेड़ों को काटकर कंक्रीट की इमारतें खड़ी करने का सिलसिला जारी है।
पुराने लोगों की मानें तो गांधी उद्यान पुराने समय में रुहेला शासकों की संपत्ति था। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी आने के बाद इसे कंपनी गार्डन नाम दिया गया। अंग्रेज शासक और उनके अफसर भी यहां घूमने आते थे। अंग्रेजों के जाने के बाद इस बाग का नाम बदलकर गांधी उद्यान कर दिया गया और यह नगर निगम की संपत्ति बन गया। नगर निगम के रिकॉर्ड में इस बाग का रकबा 13065 वर्ग मीटर है। कुछ सालों पहले तक हर तरफ हराभरा दिखाई देने वाले इस उद्यान में अब एक के बाद एक कंक्रीट की इमारत बन रही है। तालाबों और हरियाली को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कमीशनखोरी के खेल में गांधी उद्यान को बर्बाद कर खत्म करने का खेल चल रहा है।
होटल और सरकारी दफ्तर से शुरुआत
गांधी उद्यान की हरियाली को बर्बाद करने की शुरुआत सरकारी विभागों से ही हुई। पहले इस पर पर्यटन विभाग का राही रोहिला होटल और फिर डूडा का कार्यालय बनाया गया। इन दोनों ही भवनों ने उद्यान के पूर्वी ओर का एक बड़ा हिस्सा कवर कर लिया है।
तालाब पाटकर बारातघर के कमरे बना डाले
गांधी उद्यान के दक्षिणी हिस्से में पुराने समय में एक बड़ा सा तालाब हुआ करता था। सुंदरीकरण के नाम पर तालाब में बारातघर और कमरे बना दिए गए हैं। बाग का करीब एक तिहाई हिस्सा इस बारातघर के नाम पर नष्ट कर दिया गया है। इसके चलते ही गांधी उद्यान के पिछले दरवाजे भी आम लोगों के निकास को लेकर बंद रहते हैं।
शादी-बारातों की गंदगी, टहलने वाले दिक्कत में
बारातघर में शादी-पार्टी के बाद उसके चारों ओर उद्यान में गंदगी के ढेर लगे रहते हैं। कहीं खानपान का सामान तो कहीं बीयर और दारू की खाली बोतलें पड़ी नजर आती हैं। जब टहलने वाले लोग एतराज करते हैं तो सफाई कराई जाती है। इसको लेकर मार्निंग वाकर्स काफी आहत हैं। वरिष्ठ पत्रकार शंभू दयाल बाजपेयी ने इस संबंध में मेयर उमेश गौतम को पत्र लिखकर कार्रवाई को कहा है।
अब सौंदर्यीकरण के नाम पर निर्माण
पहले कराए निर्माणों से ही गांधी उद्यान का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो चुका है। इसके बावजूद यहां निर्माण का सिलसिला थमा नहीं है। अब यहां पर सौंदर्यीकरण के नाम पर अमृत योजना के तहत कैंटीन और पाथ-वे आदि का निर्माण किया जा रहा है। दो करोड़ रुपये से अधिक की लागत से यह काम महीने भर में पूरा किया जाना है।
लोगों की बात
हरियाली का रखें ख्याल, सुरक्षा भी बढ़ाएं
गांधी उद्यान में टहलते मिले सिविल लाइंस निवासी अली रहमान ने कहा कि यहां की हरियाली खत्म नहीं होनी चाहिए। निर्माण बढ़ते जा रहे हैं। सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं हैं। इसके चलते मैं तो मोबाइल या पर्स आदि कुछ भी साथ लेकर नहीं आता हूं।
रास्तों पर अंधेरा, टॉर्च लेकर आइए
राजेंद्रनगर निवासी हरमीत ने बताया कि गांधी उद्यान में निर्माण कार्यों को लेकर फिक्रमंद नगर निगम को वहां टहलने वालों की सुविधाओं का बिल्कुल ख्याल नहीं है। रात के समय मुख्य मार्ग पर तक अंधेरा बिखरा रहता है। इसके चलते वह जब टहलने आते हैं तो अपने साथ टॉर्च लेकर आते हैं।
शासन से पार्कों के सौंदर्यीकरण, बैडमिंटन कोर्ट आदि बनाने और विकलांगों के लिए सुविधाएं विकसित करने के आदेश हैं। इसके तहत ही अमृत योजना में वहां काम किया जा रहा है।
- राजेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त
बारातघर की गड़बड़ियों को लेकर शिकायत मिली है। उसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहां जो भी खामियां हैं, वे दुरुस्त कराई जाएंगी।
- उमेश गौतम, मेयर