बजट पेश होने से पहले ट्रेनों में सफर करने वाले यात्रियों में बेहतर सुविधाओं को लेकर आस जगी है। मुंबई, जयपुर, उज्जैन, अलीगढ़ रूट पर ट्रेन चलाने की गुंजाइश तलाश रहे यात्रियों को बजट से काफी उम्मीदें हैं। यात्रियों के सुझावों में हाई स्पीड ट्रेन चलाने के लिए रेल खंडों के विद्युतीकरण पर जोर देने की बात सामने आई। वहीं किसान एक्सप्रेस, चंडीगढ़-लखनऊ एक्सप्रेस, राज्यरानी एक्सप्रेस में बोगियों की संख्या के इजाफे से भी व्यस्त रूट पर यात्री भार कम करने के सुझाव दिये गए। यात्रियों ने कहा कि किराया हर साल बढ़ रहा है... हमें इतनी दिक्कत भी नहीं, लेकिन ट्रेनों में सुविधायें भी बढ़नी चाहिए।
सिर्फ दक्षिण दिशा के लिए ट्रेनों के संचालन के साथ बरेली से मुंबई के व्यस्त रूट पर चलने वाली गाड़ी संख्या 13314 सप्ताह में एक दिन संचालित की जाती है। यह ट्रेन प्रतिदिन चलने से यात्रियों का दबाव कम हो सकता है। बरेली से जयपुर के लिए दोपहर बाद गाड़ी चलाने की जरूरत है। अजमेर जाने वाले यात्रियों को आला हजरत एक्सप्रेस का सहारा रहता है, लेकिन इस रूट पर शाम के वक्त ट्रेन नहीं है। इसी तरह महाकाल एक्सप्रेस 14320/14319 की तर्ज पर उज्जैन रूट पर बरेली से एक और ट्रेन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। अलीगढ़ रूट पर सिर्फ तीन पैंसेजर ट्रेन संचालित की जाती है, यहां यात्रियों का दबाव देखते हुए एक एक्सप्रेस ट्रेन चलानी चाहिए। गोरखपुर के लिए इंटरसिटी की तर्ज पर ट्रेन चलाये जाने की जरूरत है। काठगोदाम से लखनऊ चलने वाली 15044/43 को प्रतिदिन चलाया जाना चाहिए। इसके स्टापेज शाहजहांपुर और हरदोई होने चाहिए।
विद्युतीकरण होने के बाद बढ़ेगी स्पीड
पूर्वोत्तर रेलवे ने तीन सालों में सौ फीसदी रेल खंड को विद्युतीकरण करने का लक्ष्य लिया है। रेल सूत्रों के मुताबिक मथुरा जंक्शन से फर्रुखाबाद होकर कानपुर के रावतपुर रेलवे स्टेशन तक विद्युतीकरण किया जा रहा है। जनसंपर्क अधिकारी राजेश सिंह के मुताबिक इज्जतनगर मंडल के सभी रेलखंडों को आने वाले तीन साल में विद्युतीकरण कर दिया जाएगा। विद्युुतीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों की गति भी बढ़ेगी।
इन गाड़ियों में कोच बढ़ाने की मांग --
- इंटरसिटी एक्सप्रेस में एसी के दो चेयरकार कोच बढ़ने चाहिए।
- राज्यरानी एक्सप्रेस 12 बोगी के साथ चलाई जा रही है, जबकि इलेक्ट्रिक इंजन के साथ चलने वाली ट्रेन में 18 से 20 बोगी होनी चाहिए।
- किसान एक्सप्रेस 13307/13308 में एसी द्वितीय और तृतीय श्रेणी के दो-दो कोच हैं, एसी कोच की संख्या बढ़नी चाहिए।
- 12231/12232 लखनऊ-चंडीगढ़ में छह स्लीपर और छह एसी कोच लगते हैं।
- कानपुर से अमृतसर के बीच चलने वाली 22496/22495 एक्सप्रेस में स्लीपर कोच बढ़ाये जा सकते हैं। मौजूदा समय में पांच स्लीपर के साथ चल रही है।
- कामाख्या से भगत की कोठी के बीच चलने वाली 15823/15824 में भी स्लीपर कोच का इजाफा होना चाहिए।
यात्रियों से बातचीत
मेरा सुझाव है कि हर बोगी में डस्टबिन होने चाहिए। स्वच्छता अभियान तभी सफल हो सकेगा। रेलवे ट्रेनों का वास्तविक समय अपलोड नहीं करता है। जिससे यात्री भ्रमित होते रहते हैं। किराया पूरा लिया जाता है तो समय पर ट्रेन नहीं आने पर रेलवे को खुद पेनाल्टी झेलनी चाहिए।
- कमल शर्मा, फरीदाबाद
डोरमेट्री बुकिंग सुविधा ऑनलाइन किए जाने के बाद इंटरनेट का इस्तेमाल कम करने वाले यात्रियों के लिए मुसीबत हो चुकी है। स्टेशन पर स्टाफ साइबर कैफे में जाकर बुकिंग कराकर आने के लिए कहता है। यह सुविधा ऑफ लाइन भी होनी चाहिए। बुजुर्ग यात्रियों को रियायत होनी चाहिए।
- रितेश कुमार, इलाहाबाद
रुद्रपुर के लिए सिर्फ बाघ एक्सप्रेस की सुविधा है। बरेली और रुद्रपुर के बीच यात्रियों का दबाव अधिक होने के बावजूद सिर्फ एक ही ट्रेन चलती है। कम से कम एक और ट्रेन यहां चलनी चाहिए। वहीं शौचालयों की स्वच्छता के लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है।
- अमित पाल, रुद्रपुर
ट्रेनों में चलने वाला स्टाफ व्यवहारिक नहीं है। ट्रेनों में साफ सफाई की सुविधा भी ठीक नहीं है। ट्रेनें पहले लेट चलती है फिर अचानक निरस्त कर दी जाती है। दिक्कत तो यात्रियों को उठानी पड़ती है। ट्रेन निरस्त होने पर समायोजन की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।
- मुकेश कुमार, जयपुर