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कमेटी करेगी बीडीए इंजीनियर के वायरल वीडियो की जांच

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ऑडियो वायरल - फोटो : demo photo
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कमिश्नर ने डीएम को दिए कमेटी गठित कर जांच कराने के आदेश
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आवासीय प्रोजेक्ट के पूर्णता प्रमाण पत्र के लिए रिश्वत मांगने का है आरोप

बरेली। आवासीय प्रोजेक्ट का पूर्णता सर्टिफिकेट देने के मामले में रिश्वत मांगने के आरोपों में घिरे बीडीए के अधिशासी अभियंता (मानचित्र) डीएस तोमर को प्रशासनिक जांच का सामना करना पड़ेगा। शिकायत मिलने के बाद बीडीए अध्यक्ष (मंडलायुक्त) रणवीर प्रसाद ने डीएम को कमेटी गठित कराकर मामले की जांच कराने के आदेश दिए हैं। हालांकि डीएम का कहना है कि उन्हें अभी ऐसा कोई आदेश नहीं मिला है। बिल्डर का कहना है कि वीडियो क्लिप के साथ मामले की शिकायत डीएम से भी की गई है।
पिछले कुछ दिनाें में बीडीए इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार के आरोपों का यह दूसरा मामला सामने आया है। कुछ दिन पहले बीडीए के ही एक अभियंता पर फाइलें पास करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए ठेकेदारों ने हंगामा किया था। वहीं अभिनव इंटरप्राइजेज के साझेदार राज किशन गुप्ता और मधु कोकरा ने अधिशासी अभियंता (मानचित्र) डीएस तोमर पर रुपये लेने के आरोप लगाए हैं। मामले की शिकायत 22 सितंबर को लखनऊ में प्रमुख सचिव (आवास) से की गई थी। मधु कोकरा का कहना है कि अब उन्होंने डीएम को साक्ष्य के तौर पर अधिशासी अभियंता की वीडियो क्लिप देते हुए मामले की शिकायत की है। मांग की है कि प्रोजेक्ट की फाइल किसी और अभियंता को सौंपी जाए। उनका दावा है कि वीडियो में बीडीए इंजीनियर रुपयों की लेनदेन की बात कर रहे हैं।
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मधु कोकरा ने बताया कि जुलाई 2008 में उनकी कंपनी ने बरेली-पीलीभीत रोड पर वह मल्टीप्लेक्स बनाना शुरू किया था। उन्हें पीडब्ल्यूडी से अनापत्ति भी मिल गई थी। लेकिन बाद में किसी कारणवश प्रोजेक्ट निर्माण कार्य रोक दिया गया। उन्होंने तब चाहरदीवारी ही बनाई थी। अब 19 मार्च 2020 को इसी जमीन पर उन्होंने आवासीय प्रोजेक्ट के लिए बीडीए में आवेदन किया था, जो स्वीकृत हो गया। 2008 से 2014 तक प्रोजेक्ट के सामने सिंगल रोड थी। बाद में पीलीभीत रोड नेशनल हाईवे में बदलने के बाद भी प्रोजेक्ट स्थल की हाईवे से दूरी 33.60 मीटर है। हाईवे बनने से पहले प्रोजेक्ट की दूरी 36.60 मीटर थी।
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मधु कोेकरा ने आरोप लगाया है कि सिर्फ तीन मीटर की दूरी घटने के बहाने अभियंता ने अड़ंगा लगा दिया और रिश्वत मांगने लगे। इस बारे में उन्होंने तत्कालीन बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल से मुलाकात कर शिकायत की थी। लेकिन वीसी के सामने अभियंता ने पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने में कोई भी आपत्ति होने से इंकार कर दिया था। लेकिन बाद में रिश्वत मांगने लगे। बीडीए इंजीनियर का यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।

कुछ दिन पहले किसी प्रोजेक्ट के पूर्णता प्रमाण पत्र को लेकर एक शिकायत मेरे पास आई थी। शिकायतकर्ता ने अपनी फाइल को संबंधित अधिशासी अभियंता से हटाकर किसी अन्य को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया था। मैंने इस मामले में जिलाधिकारी (बीडीए उपाध्यक्ष) को कमेटी गठित करके जांच कराने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इंजीनियर द्वारा रिश्वत मांगे जाने की कोई शिकायत या इससे संबंधित कोई वीडियो शिकायतकर्ता ने तब नहीं दिया था। लेकिन यदि ऐसा कोई वीडियो सामने आया है तो यही कमेटी उस वीडियो की भी जांच करेगी। - रणवीर प्रसाद, कमिश्नर

मेरे संज्ञान में न तो ऐसा कोई वीडियो आया है न ही मुझे कोई शिकायत मिली है। जांच कमेटी गठित करने संबंधी आदेश अभी मुझे नहीं मिले हैं। पत्र मिलने पर मामले की जांच करा ली जाएगी। जांच में जो तथ्य प्रकाश में आएंगे उनके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - नितीश कुमार, डीएम

अभियंता को वायरल वीडियो और जांच की परवाह नहीं

बरेली। बीडीए के अधिशासी अभियंता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रमुख सचिव आवास से लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय तक मामले की शिकायत हो चुकी है। कमिश्नर मामले में कमेटी से जांच कराने का आदेश कर चुके हैं। लेकिन आरोपों के घेरे में खड़े अधिशासी अभियंता डीएस तोमर को जैसे वीडियो और जांच, किसी की परवाह नहीं। इस मामले में उनका पक्ष पूछा गया तो बड़े बेपरवाह अंदाज में उनका कहना था कि, मुझे कुछ नहीं कहना। उनके मुताबिक उन्हें ऐसे किसी वीडियो, शिकायत और जांच के आदेश की जानकारी ही नहीं है।
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