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नहर की जमीन पर खड़ी हो गईं कॉलोनियां और सरकारी भवन

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नहर की जमीन पर खड़ी की गईं कॉलोनियां। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। दमखोदा से निकलकर शहर से गुजरते हुए बीसलपुर तक जाने वाली ‘बरेली रजवाह’ के अवशेष मुंशीनगर और पीर बहोड़ा में नाली और टूटी हुई पुलिया की शक्ल में बाकी हैं। शेष जगहों पर अफसरों की मिलीभगत से कॉलोनाइजर ने नहर पाटकर कंक्रीट के जाल खड़े कर दिए हैं। सालों पहले नहर को बचाने के लिए जोरे-शोर से हुई मुकदमेबाजी के बाद भी अफसर नहीं चेते और अब नहर के अवशेष भी खत्म हो रहे हैं। आनन-फानन में 19 सालों बाद कार्रवाई का दौर भी शुरू हुआ तो वह भी महज खानापूर्ति साबित हो रहा है।
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साल 1962-63 में शारदा ब्रांच से नहर निकाली गई थी। जो बरेली रजवाहा के नाम से दर्ज है। रिछा से शुरू हुई यह नहर 41.838 किमी. लंबी और 40 से 55 मीटर चौंड़ी है। जो सैदपुर चुन्नी, चावड़, मुड़िया अहमदनगर, पीर बहोड़ा, बडी बिहार, तुलाशेरपुर डोहरा होते हुए हरुनगला के पास आकर खत्म होती है। शहर का दायरा बढ़ने से पहले इस नहर से इन क्षेत्रों के किसानों को पानी मुहैया होता था। साथ ही, लोग शाम को नहर के किनारे टहलते, खेलते और समय गुजारते थे। पीरबहोड़ा से पहले यह नहर पुराने स्वरूप में काफी हद तक अब भी दिखाई देती है लेकिन शहर के भीतर नहर की जमीन पाटकर कॉलोनियां बनाने से नहर करीबन विलुप्त हो चुकी है। अमर उजाला की टीम ने बुधवार को नहर के गुजरने वाले प्वॉइंट्स का मुआयना किया। पीर बहोड़ा में नहर नाली की शक्ल में बची हुई तो है लेकिन आसपास के दुकानदारों ने इसे पाट लिया है। इसके बाद मुंशीनगर में नहर के अवशेष दिखाई देते हैं लेकिन इसके आगे लगभग नहर विलुप्त हो चुकी है। सनराइज, सनसिटी, डोहरा, विशाल सिटी, महेंद्र नगर, कुसुमनगर समेम अन्य कॉलोनियां बस गईं। करीब 30 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा हो चुका है। नहर को पाट कर इसके ऊपर बड़ी बड़ी कॉलोनियां बन चुकी हैं। कॉलोनियों के नीचे नहर दफन हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि नहर की जमीन पर मकान बनते रहे और अधिकारी आंख मूंद कर सब कुछ देखते रहे। बीच-बीच में तेज तर्रार डीएम ने कब्जा छुड़ाने की कोशिश भी की लेकिन अवैध कब्जा करने वाले रसूखदार बिल्डरों के सामने उनकी एक न चली।
क्या कहता है नहर विभाग का रिकॉर्ड
नहर विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक सनसिटी, नॉर्थ सिटी, कुर्मांचलनगर पूरी तरह से नहर की जमीन पर बसे हुए हैं। इसके अलावा ग्रीनपार्क, कुसुमनगर का सनराइज, महेंद्र नगर कॉलोनियों का भी कुछ हिस्सा नहर की जमीन पाटकर बनाई गई है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी और खुद नगर निगम की ओर से भी कॉलोनियों को रास्ता आदि मुहैया कराने के लिए रोड भी बना दी गई है। अफसरों का दावा है कि मामलों पर अगर वह कार्रवाई भी करें तो एक बारगी निजी कॉलोनियों से गुजर रही नहर की भूमि को खाली करवा लेंगे, लेकिन सरकारी महकमे से निपटना आसान नहीं होगा।
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बरेली रजवाहा की भूमि पर हुए कब्जे को खाली कराने की कवायद शुरू कर दी गई है। पहले पुराने चल रहे मामलों जिसमें पक्ष में फैसला आया है वह हटाए जाएंगे, इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। नहर को शुरू कराने का लक्ष्य रखा है और इसे जरूर पूरा किया जाएगा। - एसएस यादव, एक्सईएन, रुहेलखंड नहर विभाग
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