रुहेलखंड विश्वविद्यालय की केंद्रीयकृत प्रवेश प्रक्रिया के खिलाफ सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों का विरोध तेज हो गया है। वह चाहते हैं कि प्रवेश की जिम्मदारी उनसे न छीनी जाए। विवि के व्हाट्सएप ग्रुप पर पिछले दो दिनों से कॉलेजों ने सीधे विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं। यहां तक कह रहे हैं कि विवि को अपना फैसला बदला चाहिए। वहीं, विवि प्रशासन का कहना है कि केंद्रीयकृत व्यवस्था होने से सेशन रेग्युलर हो जाएगा और अनियमितताओं पर भी लगाम लग जाएगी।
दरअसल, केंद्रीयकृत प्रवेश होने से प्रवेश की सारी बागडोर विवि के पास आ जाएगी। प्रवेश जुलाई में ही होंगे, जबकि कॉलेज दिसंबर तक मनमाने तरीके से प्रवेश लेते हैं। लेट प्रवेश लेने से छात्रों से अच्छा खासा पैसा भी वसूल लेते थे। अब नई व्यवस्था से वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। जो छात्र विवि आवंटित करेगा, कॉलेज केवल उनका ही प्रवेश लेगा। बड़े सेल्फ फाइनेंस कॉलेज खुलकर नहीं बोल रहे हैं पर छोटे-छोटे सेल्फ फाइनेंस कॉलेज खुलकर विरोध करने लगे हैं, क्योंकि सबसे ज्यादा नुकसान उनको ही होगा। कुछ कॉलेज संचालकों ने विवि पर आरोप भी लगाए कि नकेल कसने के लिए सेल्फ फाइनेंस कॉलेज और वसूली के लिए भी सेल्फ फाइनेंस कॉलेज, जबकि अनुदानित और राजकीय कॉलेजों में इतनी गड़बड़ियां होती हैं, उनको कोई नहीं देखता। कुछ तो विवि को आइना दिखा रहे हैं कि पहले प्रवेश परीक्षा वाले कोर्स के एडमिशन ही सुधार लो। कुलपति ने स्पष्ट कह दिया है कि इस बार से ही यह व्यवस्था लागू कर दी जाएगी।
कॉलेज तो विरोध करेंगे पर इस व्यवस्था से सेशन समय से शुरू हो सकेगा। थोड़ा वक्त लगेगा पर सब पटरी पर आ जाएगा। मनमाने तरीके से होने वाले प्रवेश भी रुक जाएंगे।
- प्रोफेसर अनिल कुमार शुक्ला, कुलपति